एलडीए के कागजी शेर, डालीगंज में कानून रौंद रहे बिल्डर, अधिकारी बजा रहे भ्रष्टाचार का डमरू ! नोटिस का शोर और सीलिंग पर मौन, जोन-4 में एलडीए की कमीशन वाली नींद !

लखनऊ -: ( मोहम्मद सैफ, ) -: नवाबों के शहर में अब एक नया अजूबा देखने को मिल रहा है, हवा में उड़ते नोटिस और जमीन पर तनते अवैध महल, मामला लखनऊ विकास प्राधिकरण के प्रवर्तन जोन-4 का है, जहाँ के अधिकारी सरकार से वेतन तो वफादारी का लेते हैं, लेकिन उनकी असली निष्ठा बिल्डरों के चरणों में नतमस्तक नज़र आती है।
डबल इंजन की सरकार में डबल सैलरी का खेल, सरकार से वेतन, बिल्डर से बोनस!
डालीगंज के चर्च रोड वाले इलाके में अवैध निर्माण की शिकायत क्या हुई, मानो अधिकारियों ने अपनी कलम की स्याही से बिल्डरों के लिए सुरक्षा कवच ही लिख दिया।
पूर्व में तैनात अवर अभियंता हेमंत कुमार की रिपोर्ट को देखिए, क्या कलाकारी दिखाई है! कागजों पर निरीक्षण हो गया, धाराएं लग गईं, और चालान की आख्या भी डिजिटल तरीके से न्यायालय भेज दी गई। लेकिन धरातल पर? तो बिल्डर कानून के गाल पर तमाचा जड़ते हुए ईंट पर ईंट चढ़ा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार पर बुलडोजर चलाने की बात करते हैं, लेकिन जोन-4 के अधिकारियों ने शायद अपना अलग ही बुलडोजर पाल रखा है, जो केवल गरीबों की झोपड़ियों तक जाता है। बिल्डरों के व्यवसायिक निर्माणों तक थक जाता है। मुख्यमंत्री पोर्टल की शिकायतों का निस्तारण यहाँ जादूगरी के जरिए किया जाता है। शिकायतकर्ता को बताया जाता है कि कार्रवाई हो रही है, जबकि बिल्डर अधिकारियों की जेबों की खनक के दम पर नियमों को अपने पैरों तले रौंद रहा है।
बिजली विभाग और पुलिस को पत्र भेजने की रस्म भी अदा कर दी जाती है। लेकिन लगता है कि इन अवैध इमारतों की बिजली सीधे अधिकारियों के आशीर्वाद से जल रही है। नियम और कानून शायद केवल उन बेचारों के लिए हैं जिनकी पहुंच साहब के दफ्तर तक नहीं है। यहाँ तो 2025 में नोटिस कटा और 2026 आ गया, लेकिन सीलिंग की कार्रवाई का रास्ता शायद अधिकारी अभी तक गूगल मैप पर ढूँढ रहे हैं।
क्षेत्र में चर्चा है कि प्रवर्तन जोन-4 के जोनल अधिकारी एवं सहायक अभियंता और अवर अभियंता ये अधिकारी बड़े भाग्यशाली हैं, इन्हें महीने के अंत में सरकारी खजाने से वेतन मिलता है और महीने भर बिल्डरों से बोनस, भ्रष्टाचार की यह जीती-जागती मिसाल डालीगंज में चीख-चीख कर कह रही है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण अब विकास कम और विनाश के सौदे ज्यादा कर रहा है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और वरिष्ठ अधिकारी मौन व्रत धारण कर लें, तो जनता यही पूछेगी, ये भ्रष्टाचार का प्रतीक खड़ी इमारतें किसकी सफलता का जश्न मना रही हैं? सिस्टम की या उस जेब की जो कभी भरती ही नहीं?




