इंडियास्किल्स 2025-26: ग्रेटर नोएडा में कौशल महाकुंभ का समापन, शंघाई वर्ल्डस्किल्स के लिए तैयार होंगे भारतीय जांबाज , ओडिशा 57 पदकों के साथ बना चैंपियन, तमिलनाडु दूसरे स्थान पर; उत्तराखंड सहित देश भर के 650 हुनरमंदों ने दिखाया दम

देहरादून -: ( ग्रेटर नोएडा ) -: भारत के कौशल विकास के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए ‘इंडियास्किल्स राष्ट्रीय प्रतियोगिता 2025-26’ का ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में भव्य समापन हुआ। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) द्वारा आयोजित इस देश की सबसे बड़ी कौशल प्रतियोगिता ने साबित कर दिया कि भारत का युवा अब केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर के ‘हुनर’ से लैस होकर दुनिया का नेतृत्व करने को तैयार है। इस महाकुंभ में देशभर के 650 शीर्ष प्रतिभागियों ने 63 अलग-अलग श्रेणियों में अपनी तकनीकी दक्षता का प्रदर्शन किया।
समापन समारोह में 288 मेधावियों को पदक प्रदान किए गए, जिनमें 63 स्वर्ण, 64 रजत, 68 कांस्य और 93 ‘मेडलियन फॉर एक्सीलेंस’ शामिल हैं। राज्यों की रैंकिंग में ओडिशा 57 पदकों के साथ शीर्ष पर रहा, जबकि तमिलनाडु ने 46 पदक जीतकर दूसरा स्थान प्राप्त किया। इस बार प्रतियोगिता में 45 महिला विजेताओं की मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि क्लाउड कंप्यूटिंग, सीएनसी मशीनिंग और मोबाइल ऐप डेवलपमेंट जैसे तकनीकी क्षेत्रों में भी बेटियां पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं।
मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) “जयन्त चौधरी” ने विजेताओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा, “इंडियास्किल्स उस युवा भारत की झलक है जो सीखने और खुद को ढालने के लिए तत्पर है। शिक्षा हमें आधार देती है, लेकिन कौशल उसे मकसद और दिशा प्रदान करता है।” उन्होंने सरकार के संकल्प को दोहराते हुए बताया कि शिक्षा में 84,000 करोड़ और आईटीआई संस्थानों को आधुनिक बनाने के लिए “60,000 करोड़ “ का अभूतपूर्व निवेश किया जा रहा है। समारोह में राजस्थान के उद्योग एवं खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कहा कि स्किल आंतरिक क्षमता का प्रदर्शन है। वहीं, उत्तर प्रदेश के कौशल विकास मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ जैसी पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि हम केवल हाथ प्रशिक्षित नहीं कर रहे, बल्कि आत्मविश्वास बढ़ा रहे हैं। बिहार के मंत्री संजय सिंह टाइगर और महाराष्ट्र के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने भी युवाओं को ‘आत्मनिर्भर भारत’ का असली ब्रांड एंबेसडर बताया।
इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता के स्वर्ण और रजत पदक विजेता अब ‘वर्ल्डस्किल्स शंघाई 2026’ में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। ये युवा अब अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की देखरेख में कठिन प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे ताकि वैश्विक मंच पर तिरंगा फहरा सकें। प्रतियोगिता केवल पारंपरिक कार्यों तक सीमित नहीं रही। इसमें ड्रोन टेक्नोलॉजी, वेब टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा, फ्लोरिस्ट्री, फैशन टेक्नोलॉजी, ब्यूटी थेरेपी और हॉस्पिटैलिटी जैसे आधुनिक डोमेन में भी कड़ा मुकाबला देखने को मिला। एनएसडीसी के सीईओ अरुण कुमार पिल्लई ने कहा कि गाँवों के साधारण घरों से निकलकर इन युवाओं का सफर यह साबित करता है कि लगन हो तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। 3.65 लाख आवेदकों के साथ शुरू हुआ यह सफर अब शंघाई की ओर बढ़ चला है। यह आयोजन न केवल कौशल का प्रदर्शन था, बल्कि भारत को ‘वर्ल्ड स्किल कैपिटल’ बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम है।
