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ओमान तट के पास जहाजों पर हमले से भारत नाराज, अमेरिकी कार्यकारी राजदूत को दूसरी बार किया तलब

नई दिल्ली: ओमान के समुद्री क्षेत्र में भारतीय नाविकों वाले व्यापारिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों को लेकर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। केंद्र सरकार ने अमेरिका के कार्यकारी राजदूत Jason Meeks को तलब कर अपना विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय में उनकी करीब 45 मिनट तक अधिकारियों के साथ बातचीत हुई।

हाल ही में भारतीय क्रू वाले एक और जहाज पर हमला हुआ, जिसमें 20 भारतीय नाविक सवार थे। यह चार दिनों के भीतर भारतीय नाविकों से जुड़ी तीसरी बड़ी घटना है। लगातार हो रहे हमलों ने Strait of Hormuz और Gulf of Oman क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार अमेरिकी राजनयिक को विदेश मंत्रालय के अपर सचिव स्तर के अधिकारी ने बुलाया था। इस मुद्दे पर भारत द्वारा अमेरिकी दूतावास के अधिकारी को तलब किए जाने की यह दूसरी घटना है। भारत ने स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिकों और समुद्री कर्मियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

व्यापारिक जहाजों पर बढ़ते हमलों के बीच Directorate General of Shipping (DGS) ने लगभग 18,000 भारतीय नाविकों के लिए नई समुद्री सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है।

एडवाइजरी में होर्मुज जलडमरूमध्य, ओमान की खाड़ी और आसपास के संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय नाविकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

पहली घटना: MT Marivex पर हमला

8 जून को एमटी मारिवेक्स नामक जहाज पर हमला हुआ था। हमले के बाद जहाज में आग लग गई थी। हालांकि जहाज पर सवार सभी 24 भारतीय चालक दल के सदस्य सुरक्षित बच गए।

दूसरी घटना: MT Setebello पर हमला

10 जून को ओमान की खाड़ी में एमटी सेटेबेलो टैंकर को निशाना बनाया गया। इस जहाज पर 24 भारतीय नाविक सवार थे। इनमें से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन तीन भारतीय नाविकों की बाद में मौत की पुष्टि हुई।

तीसरी घटना: MT Jalveer पर हमला

11 जून को एमटी जलवीर नामक जहाज पर हमला हुआ। इस जहाज पर 20 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। भारत ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए संबंधित देशों से समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

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