जलवायु संकट से निपटने के लिए हरियाणा का बड़ा कदम, 100 करोड़ रुपये के ‘ग्रीन फंड’ से बदलेगी विकास की दिशा
स्वच्छ ऊर्जा, जल संरक्षण और जीरो-एमिशन परिवहन को मिलेगा बढ़ावा; यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए मिशन मोड में काम करेगी सरकार।
चंडीगढ़: जलवायु परिवर्तन और बढ़ते पर्यावरणीय संकटों के बीच हरियाणा सरकार ने हरित विकास को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में 100 करोड़ रुपये के प्रारंभिक प्रावधान के साथ ‘हरियाणा ग्रीन क्लाइमेट रेजिलिएंट फंड’ स्थापित करने की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करना और प्रदेश को सतत विकास के मॉडल के रूप में विकसित करना है।
सरकार का मानना है कि तेजी से बदलते जलवायु परिदृश्य और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच दीर्घकालिक एवं प्रभावी उपायों की आवश्यकता है। इसी सोच के तहत ग्रीन क्लाइमेट रेजिलिएंट फंड को प्रदेश में पर्यावरण-अनुकूल परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देने के लिए तैयार किया गया है।
इस फंड के माध्यम से स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं, सौर ऊर्जा विस्तार, ऊर्जा दक्षता कार्यक्रमों, जल संरक्षण योजनाओं, शहरी हरितीकरण, जलवायु-अनुकूल कृषि और प्रकृति आधारित समाधानों को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही शून्य-उत्सर्जन (जीरो-एमिशन) परिवहन व्यवस्था को प्रोत्साहित कर प्रदूषण कम करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से न केवल पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी, बल्कि हरित प्रौद्योगिकी और सतत विकास से जुड़े क्षेत्रों में निवेश और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। सरकार निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दे रही है ताकि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नवाचारों को गति मिल सके।
पर्यावरण संरक्षण की इस व्यापक रणनीति का दूसरा प्रमुख हिस्सा यमुना नदी के पुनर्जीवन और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ा है। हरियाणा से गुजरने वाली यमुना नदी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने मिशन मोड में कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर नदी में गिरने वाले प्रदूषित जल और अपशिष्ट को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
यमुना सफाई अभियान के अंतर्गत सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाने, अवैध अपशिष्ट प्रवाह पर रोक लगाने, औद्योगिक इकाइयों की निगरानी मजबूत करने, नदी तटों के संरक्षण तथा हरित पट्टियों के विकास जैसे कदम शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि नदी में गिरने वाले सभी नालों के पानी का वैज्ञानिक उपचार हो और बिना शोधन के कोई भी अपशिष्ट यमुना में न पहुंचे।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 जून को गुरुग्राम में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए शुरू की गई विभिन्न योजनाओं और पहलों की जानकारी साझा की जाएगी। इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की थीम प्रकृति आधारित समाधानों और टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
पर्यावरण मंत्री Rao Narbir Singh ने कहा कि जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि ग्रीन क्लाइमेट रेजिलिएंट फंड, स्वच्छ ऊर्जा, जल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और यमुना पुनर्जीवन जैसी पहलें हरियाणा को अधिक स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
सरकार को उम्मीद है कि इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से हरियाणा आने वाले वर्षों में हरित और जलवायु-अनुकूल विकास के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान मजबूत करेगा।





