कानपुर

कानपुर में गैस सिलेंडर का संकट: डीएम ने दो एजेंसियों पर लगाया 11.18 लाख का जुर्माना

कानपुर में जिलाधिकारी ने दो गैस एजेंसियों पर 11.18 लाख का जुर्माना लगाते हुए तीन दिन में आपूर्ति सुधारने का अल्टीमेटम दिया है.

Photo Credit: ETV Bharat

कानपुर: कानपुर शहर में कई गैस एजेंसियां ऐसी हैं, जिनकी लापरवाही की बानगी जिलाधिकारी रोज अपने कार्यालय में बैठकर देख रहे थे. एजेंसियों के बाहर सुबह से लेकर शाम तक उपभोक्ताओं की लंबी कतारें दिख रही थीं और भीषण गर्मी में लोग हंगामा करने को मजबूर थे. ऐसे में बुधवार को जब डीएम ने देखा कि समस्या विकराल है, तो उन्होंने कलेक्ट्रेट सभागार में गैस एजेंसी संचालकों और जिम्मेदार अफसरों के साथ आपात बैठक की. जिलाधिकारी ने सख्त निर्देश दिए कि होम डिलीवरी बढ़ाकर अधिकतम दो से तीन दिनों के अंदर सभी लंबित आपूर्ति हर हाल में पूरी की जाए.

सुमिता और भागवत गैस एजेंसी पर गिरी गाज: समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कुछ गैस एजेंसियों पर भारी बैकलॉग होने के चलते उपभोक्ताओं को हफ्तों तक इंतजार करना पड़ रहा है. इस पर डीएम का पारा चढ़ गया और उन्होंने संबंधित एजेंसियों को तीन दिन के भीतर स्थिति सामान्य करने का कड़ा अल्टीमेटम दिया. विभागीय आंकड़ों के अनुसार, सुमिता गैस एजेंसी पर 2102, भागवत गैस एजेंसी पर 3588 और मीरा गैस एजेंसी पर 2097 सिलेंडरों का बैकलॉग पाया गया है. डीएम के निर्देश पर अब तक दो एजेंसियों पर कुल 11.18 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया

लापरवाही पर FIR की चेतावनी: जुर्माने की कार्रवाई के तहत भागवत गैस एजेंसी पर 4.68 लाख रुपये और सुमिता गैस एजेंसी पर 6.50 लाख रुपये की पेनाल्टी लगाई गई है. जिलाधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि तय समयसीमा में सुधार नहीं दिखा, तो संबंधित एजेंसी संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी. अब हर गैस एजेंसी पर रोजाना सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक एक जिम्मेदार कर्मचारी तैनात रहेगा जो उपभोक्ताओं की शिकायतों का तत्काल निस्तारण करेगा. सभी शिकायतों को रजिस्टर में दर्ज कर संबंधित पूर्ति निरीक्षक को उपलब्ध कराना अब अनिवार्य कर दिया गया है.

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होम डिलीवरी बढ़ाने के निर्देश: प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए सभी एजेंसियां अब प्रतिदिन का बैकलॉग डेटा जिला पूर्ति अधिकारी को उपलब्ध कराएंगी. जिलाधिकारी को यह जानकारी भी मिली है कि आपूर्ति विभाग के अधिकारी अक्सर फील्ड पर नहीं जाते हैं और ऑफिस में ही बैठे रहते हैं. डीएम ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अगर अफसर रोजाना फील्ड पर रहेंगे, तो वे खुद जमीनी हकीकत और एजेंसियों का हाल देख सकेंगे. अब लापरवाह अफसरों से भी सवाल-जवाब किया जाएगा और उन्हें नियमित रूप से निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपनी होगी.

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