
नई दिल्ली: भारतीय फुटबॉल टीम के लिए विश्व कप खेलना अभी भी सपने जैसा ही है, लेकिन समय-समय पर फुटबॉल के इस मेले में भारतीय मूल के खिलाड़ियों का जलवा देखने को मिल जाता है। अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में शुरू हो रहे फीफा विश्व कप में भारतीय मूल के चार खिलाड़ी दिखेंगे।
विश्व कप के इतिहास में पहली बार होगा जब इतनी संख्या में भारतीय मूल के खिलाड़ी खेलते दिखेंगे। इन खिलाड़ियों के नाम सरप्रीत सिंह, सैमुअल मुत्तुस्वामी, निशान वेलुपिल्लै और तहसीन मोहम्मद हैं।
2006 में भी हुआ था ऐसा
इससे पहले साल 2006 के विश्व कप में भारतीय मूल के विकास धोरासू ने फ्रांस की ओर से हिस्सा लिया था। विकास के पूर्वज आंध्र प्रदेश से थे। न्यूजीलैंड की टीम में शामिल सरप्रीत तो भारत के विरुद्ध भारत में खेल भी चुके हैं। उन्होंने साल 2018 के इंटरकांटिनेंटल कप में भारत के विरुद्ध दो गोल असिस्ट भी किए थे। सरप्रीत जर्मन फुटबॉल की दिग्गज टीम बायर्न म्यूनिख के लिए भी खेले हैं। आकलैंड में जन्मे 27 वर्षीय सरप्रीत के माता-पिता पंजाब से हैं।
निशान
तहसीन
हाल ही में 20 साल के हुए तहसीन मोहम्मद जमशीद के माता-पिता केरल से हैं। दोहा से अपना फुटबॉल करियर शुरू करने वाले तहसीन कतर की स्टार्स लीग में खेलने पहले पहले भारतीय मूल के खिलाड़ी हैं। साथ ही वह कतर के लिए खेलने वाले पहले भारतीय मूल के खिलाड़ी भी बनेंगे।
आईएसएल का भी कनेक्शन
आईएसएल फ्रेंचाइजी केरला ब्लास्टर्स की ओर से खेल चुके डकेंस नाजोन भी इस विश्व कप में हैती की टीम में शामिल हैं। 2016 आईएसएल सीजन में केरल की ओर से खेल चुके नाजोन फिलहाल ईरान के शीर्ष क्लब स्टेघलाल से खेलते हैं। नाजोन हैती की ओर से 78 मैच खेल चुके हैं और उन्होंने 2014 में हैती की राष्ट्रीय टीम के लिए पदार्पण किया था। वह हैती के लिए 44 गोल कर चुके हैं।
