पंजाब में ‘गुरु का कानून’ पर जोर: बेअदबी रोकने के लिए नया बिल, स्पीकर ने मोर्चा स्थल पर सौंपी कॉपी !
पंजाब -: (पटियाला ) -: Kultar Singh Sandhwan ने धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी को रोकने के लिए प्रस्तावित नए कानून को लेकर बड़ा कदम उठाया है। वह Patiala के समाना क्षेत्र में चल रहे Dharam Yudh Morcha स्थल पर पहुंचे और आंदोलनकारियों को बिल की प्रति सौंपी।
‘गुरु का कानून’ क्यों खास है?
स्पीकर ने इस विधेयक को “गुरु का कानून” बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य समाज में आपसी सम्मान और धार्मिक मूल्यों की रक्षा करना है। उन्होंने बताया कि यह कानून सिर्फ सजा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को सम्मान और सहिष्णुता का संदेश भी देता है।
वादा निभाया, बिल की कॉपी सौंपी
संधवां ने कहा कि उन्होंने अपने पिछले दौरे में आंदोलनकारियों से वादा किया था कि वे बिल की कॉपी लेकर आएंगे। अब उन्होंने वह वादा पूरा कर दिया है और प्रस्तावित कानून की जानकारी विस्तार से साझा की है।
मोर्चा जारी, मंजूरी तक प्रदर्शन
मोर्चा संयोजकों का कहना है कि जब तक राज्यपाल से इस बिल को मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। बताया जा रहा है कि एक प्रदर्शनकारी लगातार टावर पर चढ़कर विरोध जता रहा है।
विधानसभा में पास हुआ अहम बिल
Bhagwant Mann की सरकार ने इस विधेयक को विधानसभा में पेश किया था, जहां इस पर विस्तृत चर्चा के बाद इसे पारित किया गया। मुख्यमंत्री ने बहस के दौरान कहा कि पहले कई मामलों में आरोपियों को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताकर केस कमजोर कर दिया जाता था, लेकिन अब नए प्रावधानों में इस पहलू को ध्यान में रखते हुए सख्ती की गई है।
क्या है नए कानून का उद्देश्य?
इस प्रस्तावित कानून का नाम ‘जागत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक 2026’ रखा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य:
- धार्मिक ग्रंथों की पवित्रता की रक्षा
- बेअदबी की घटनाओं पर सख्त रोक
- दोषियों के खिलाफ कड़े कानूनी प्रावधान
क्यों जरूरी हुआ संशोधन?
सरकार के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में Guru Granth Sahib की बेअदबी की कई घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं से धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और सामाजिक तनाव भी बढ़ा। मौजूदा कानूनों में सजा को पर्याप्त कठोर न मानते हुए सरकार ने यह संशोधन लाने का फैसला किया। पंजाब में प्रस्तावित यह नया कानून धार्मिक सम्मान और सामाजिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजरें राज्यपाल की मंजूरी पर टिकी हैं।




