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मऊ सीट पर कब्जा करने के लिए राजनीतिक दलों में मची होड़

अंसारी परिवार के प्रभाव को कम करना अब तक किसी भी दल के लिए आसान नहीं

मऊ:सदर विधानसभा सीट पिछले दो दशकों से अंसारी परिवार का अभेद्य किला बनी हुई है. मुख्तार अंसारी के बाद अब उनके बेटे अब्बास अंसारी इस विरासत को संभाल रहे हैं. इस क्षेत्र की राजनीति मुख्य रूप से दलित और मुस्लिम मतदाताओं के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनका अटूट समर्थन इस परिवार को मिलता रहा है. विपक्षी दलों की तमाम कोशिशों और सत्ता परिवर्तन के बावजूद, अंसारी परिवार के प्रभाव को कम करना अब तक किसी भी दल के लिए आसान साबित नहीं हुआ है.

बीजेपी और उसके गठबंधन साथी इस बार मऊ सदर में सेंध लगाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं. सुभापा और भाजपा की साझा रणनीतियों के बीच राजपूत, यादव और ब्राह्मण जैसे जातीय समूहों को साधने की कवायद तेज है. मुख्तार अंसारी के निधन के बाद उपजी सहानुभूति और अब्बास अंसारी की राजनीतिक पकड़ को चुनौती देना भाजपा की प्राथमिकता है. हालांकि, स्थानीय जानकारों का मानना है कि इस सीट पर जातिगत समीकरण और मुस्लिम-दलिट गठजोड़ का संतुलन अभी भी अंसारी परिवार के पक्ष में झुका हुआ है.

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