लखनऊ

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने हेतु स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन एवं महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के मध्य समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

लखनऊ-: ( 07 अगस्त, 2026 ) – : उत्तर प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा रोकथाम योग्य मातृ मृत्यु को समाप्त करने के उद्देश्य से स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन, उत्तर प्रदेश सरकार एवं महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय, गोरखपुर के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह एमओयू योजना भवन, लखनऊ में श्री मनोज कुमार सिंह, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन एवं प्रो. (वैद्य) के. राम चंद्र रेड्डी, कुलपति, महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय द्वारा हस्ताक्षरित किया गया। समझौते का उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में रणनीतिक, तकनीकी, शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग स्थापित करना तथा साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता एवं प्रभावशीलता को बेहतर बनाना है।
एमओयू के अंतर्गत विश्वविद्यालय द्वारा तकनीकी एवं शैक्षणिक विशेषज्ञता, संयुक्त अनुसंधान एवं सर्वेक्षण, साक्ष्य-आधारित सुझाव, कार्यान्वयन उपकरण तथा निगरानी एवं मूल्यांकन में सहयोग प्रदान किया जाएगा। विशेष रूप से मातृ मृत्यु, एनीमिया, कुपोषण एवं नवजात संबंधी जटिलताओं को कम करने तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
साझेदारी के अंतर्गत ऐविडेंस गाईडलाईन्स, स्टेंटर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपीएस), ऑपरेशनल मैनुअल एवं पॉलिसी डाक्यूमेंट तैयार करने तथा स्वास्थ्यकर्मियों, आयुष चिकित्सकों, फील्ड वर्कर्स एवं संबंधित अधिकारियों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करने में भी सहयोग किया जाएगा।

स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन द्वारा प्राथमिकता वाले स्वास्थ्य क्षेत्रों की पहचान, नीतिगत मार्गदर्शन तथा संबंधित सरकारी विभागों के साथ समन्वय में सहयोग किया जाएगा। वहीं, विश्वविद्यालय अपने शिक्षकों, शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों की विशेषज्ञता के माध्यम से अनुसंधान, दस्तावेजीकरण, निगरानी, मूल्यांकन एवं सामुदायिक जागरूकता गतिविधियों में योगदान देगा। यह समझौता तीन वर्षों की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा तथा दोनों संस्थाओं की आपसी सहमति से इसे आगे बढ़ाया जा सकेगा। यह साझेदारी वित्तीय प्रकृति की नहीं होगी और प्रत्येक संस्था अपने स्तर पर होने वाले व्यय का वहन करेगी, जब तक कि किसी विशिष्ट परियोजना के लिए अलग से लिखित व्यवस्था न की जाए। यह सहयोग उत्तर प्रदेश में सरकार, अकादमिक संस्थानों एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों के बीच समन्वय को मजबूत करने, साक्ष्य-आधारित नीतिगत हस्तक्षेपों को बढ़ावा देने तथा रोकथाम योग्य मातृ मृत्यु को शून्य करने के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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