पुतिन का सपना, ‘अखंड रूस’

बेलारूस: आज पूरी दुनिया के मन में एक बड़ा सवाल ये है कि अगर व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के खिलाफ इस युद्ध को जीत लिया तो फिर क्या होगा? इसके बाद पुतिन क्या करेंगे? क्या वो यूक्रेन में रशिया समर्थित सरकार का गठन करके अपनी सेना को वापस बुला लेंगे या वो अपने अखंड रशिया के मिशन पर लगातार इसी तरह काम करते रहेंगे? आखिर पुतिन के दिमाग में चल क्या रहा है?
बेलारूस में सुरक्षा परिषद की बैठक में लुकाशेंको ने अपने मंत्रियों और अधिकारियों को बताया कि यूक्रेन के बाद पुतिन का अगला निशाना -मोलडोवा(मोलडोवा) हो सकता है. -मोलडोवावही देश है, जो एक जमाने में सोवियत संघ का हिस्सा हुआ करता था और वर्ष 2009 तक यहां रशिया समर्थित सरकारों का शासन हुआ करता था. लेकिन इसके बाद मोलडोवा में यूक्रेन की तरह ऐसी सरकारों का शासन आया, जिनका झुकाव रशिया से ज्यादा पश्चिमी देशों की तरफ है. इसलिए हो सकता है कि पुतिन पहले यूक्रेन पर कब्जा करें और फिर उनका अगला निशाना मोलडोवा हो सकता है.
ये बात तो लगभग सभी समझ चुके हैं कि पुतिन अब अखंड रशिया के अपने मिशन को पूरा करना चाहते हैं और इस मिशन के तहत वो रशिया की सीमाओं का लगातार विस्तार कर रहे हैं और मोलडोवा(मोलडोवा) देश इसी कड़ी का हिस्सा है और इसकी दो बड़ी वजह हैं. पहली बड़ी वजह ये हैं कि-मोलडोवा, NATO का सदस्य देश नहीं है. इसलिए अगर रशिया, वहां अपनी सेना भेजता है तो NATO देश यूक्रेन की तरह उसे भी बचाने नहीं आएंगे. दूसरी बात- मोलडोवा के पास कोई बहुत बड़ी सेना नहीं है और रशिया चाहे तो कुछ ही घंटों में उसे सरेंडर करा सकता है.





