अंतराष्ट्रीय

आतंकियों पर प्रहार के लिए अमेरिका ले सकता है भारत की मदद

वाशिंगटन:अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद वहां आतंकियो को काबू में रखने के लिए भारत की रणनीतिक भागीदारी कई देशों के लिए काफी अहम हो गई है। आतंकियों पर प्रहार के लिए अमेरिका भारत की मदद ले सकता है, इसके लिए वह बेस बनाने पर भी विचार कर रहा है। अमेरिका की ओर से भारत में बेस तलाशने की खबरों पर भारत की ओर से कोई पुष्टि या खंडन नहीं करना बताता है कि इस रणनीतिक मुद्दे पर अभी कोई भी पत्ते नही खोलना चाहता।

विदेश मंत्रालय का कहना है हम इन खबरों से अवगत हैं। हम तथ्यों का पता लगा रहे हैं और अधिक जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। उधर रणनीतिक मामलों के जानकार मानते हैं कि भारत इतनी आसानी से बेस की अनुमति नहीं देगा। लेकिन बदली हुई परिस्थिति में चर्चा बहुत से विकल्पों पर होना संभव है क्योंकि आतंकवाद भारत, अमेरिका के लिए कोर मुद्दा है। भारत ने लगभग सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद को लेकर अपनी बात को फोकस में बनाए रखा है।

जानकारों का कहना है कि अमेरिका और रूस के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों का पिछले दिनों भारत दौरा साफ संकेत है कि इस इलाके की रणनीति को लेकर काफी कुछ पर्दे के पीछे चल रहा है। अफगानिस्तान की स्थिति पर भारत मे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों के जरिए लगातार इनपुट खंगाल रहे हैं और उच्च स्तर पर नजर बनी हुई है। भारत अभी अपने हितों को खंगाल रहा है।

दरअसल, इस तरह की रिपोर्ट हैं कि अमेरिकी सरकार दूसरे देशों में ‘स्टेजिंग एरिया’ या आसान शब्दों में बेस बनाने के लिए कोशिश कर रहा है। ताकि वो सात समंदर की दूरी से भी अफगानिस्तान में आतंकियों और उनके ठिकानों पर ‘ओवर द होराइज़न’ हमले कर सके। क्या भारत में भी अमेरिका ऐसा स्टेजिंग एरिया की तलाश में है? इस पूरे मामले को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन से अमेरिकी संसद में सवाल पूछे गए। इसके जवाब में ब्लिंकन ने विस्तृत जवाब नहीं दिया, लेकिन इस बात से इनकार भी नहीं किया। रिपब्लिकन के सांसद मार्क ग्रीन ने स्टेजिंग एरिया के लिए उत्तर पश्चिमी भारत को उपयुक्त बताया और कहा कि दोहा और बाकी इलाके अफगानिस्तान से बहुत दूर हैं।

खबर यह भी है कि अफगानिस्तान से बाहर निकलने से पहले अमेरिका ने पाकिस्तान से मिलिट्री बेस को लेकर मांग की थी जिसके बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि वो सीआईए को सीमा पार आतंक विरोधी अभियानों के लिए अपनी जमीन पर बेस बनाने की अनुमति नहीं देगा। हालांकि. इस मामले को लेकर पाक ने तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं की है।

 

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