रुड़की में आक्रामक कुत्ते का आतंक, बच्चों समेत करीब 40 लोगों को काटा; गांव में दहशत
भगवानपुर क्षेत्र के सरठेड़ी गांव में कई लोगों के घायल होने की खबर। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया और कुछ को एंटी रेबीज वैक्सीन तथा सीरम दिया गया।
रुड़की, 16 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड के रुड़की क्षेत्र में आवारा कुत्ते के हमले की घटना सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, भगवानपुर क्षेत्र के सरठेड़ी गांव में गुरुवार को एक आक्रामक कुत्ते ने बच्चों सहित करीब 40 लोगों को काटकर घायल कर दिया। अचानक हुए हमलों से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। घायलों को रुड़की के सिविल अस्पताल, भगवानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और अन्य चिकित्सा केंद्रों में उपचार के लिए ले जाया गया।
कैसे हुई घटना?
रिपोर्ट के अनुसार, गांव में कुत्ते के हमले के बाद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने अपने बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों को सुरक्षित रखने की कोशिश की। घटना में कई लोगों को चोटें आईं और कुछ घाव गंभीर बताए गए हैं। इस तरह की घटनाओं में तत्काल चिकित्सा सहायता बेहद जरूरी होती है, क्योंकि कुत्ते के काटने से संक्रमण और रेबीज का खतरा हो सकता है।
मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि हमले के बाद ग्रामीणों ने कुत्ते को मार दिया। इस घटना के कारण गांव में आवागमन और सामान्य दिनचर्या प्रभावित होने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, घायलों की अंतिम संख्या, उनकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और प्रशासन की ओर से किए गए अतिरिक्त उपायों की पुष्टि आधिकारिक अपडेट से की जानी चाहिए।
घायलों को अस्पताल में मिला उपचार
रिपोर्ट के मुताबिक, रुड़की सिविल अस्पताल में पहुंचे 12 लोगों को एंटी रेबीज वैक्सीन और रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन यानी सीरम दिया गया। कुछ लोगों के घाव गहरे होने के कारण टांके लगाने पड़े। अन्य घायलों को भी अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों में उपचार के लिए पहुंचाया गया।
कुत्ते के काटने की स्थिति में घाव को तुरंत बहते पानी और साबुन से लगभग 15 मिनट तक धोना चाहिए और बिना देरी किए चिकित्सा केंद्र जाना चाहिए। चिकित्सक की सलाह के अनुसार रेबीज से बचाव का टीकाकरण और जरूरत पड़ने पर अन्य उपचार कराया जाना चाहिए। केवल घरेलू उपचार या घाव छोटा होने के आधार पर चिकित्सकीय सहायता टालना खतरनाक हो सकता है।
रेबीज के लक्षण विकसित होने के बाद यह बीमारी अत्यंत गंभीर हो सकती है। इसलिए संदिग्ध पशु के काटने या खरोंचने के बाद समय पर उपचार लेना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
गांवों में आवारा कुत्तों से सुरक्षा चुनौती
आवारा और आक्रामक कुत्तों से जुड़ी घटनाएं सार्वजनिक सुरक्षा के साथ-साथ पशु प्रबंधन का भी विषय हैं। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की दूरी, टीकाकरण की उपलब्धता और तत्काल परिवहन की समस्या घायलों के लिए चुनौती बन सकती है।
स्थानीय प्रशासन, पशुपालन विभाग, नगर निकाय और स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय से ऐसी घटनाओं पर प्रतिक्रिया बेहतर की जा सकती है। संदिग्ध रूप से बीमार या आक्रामक पशु दिखाई देने पर प्रशिक्षित पशु नियंत्रण कर्मियों को सूचना देना जरूरी है। लोगों को स्वयं जोखिम उठाकर पशु को पकड़ने या उसके पास जाने से बचना चाहिए।
प्रशासन और ग्रामीणों के लिए आगे की प्राथमिकताएं
घटना के बाद घायलों का उपचार, रेबीज से बचाव की दवाओं की उपलब्धता और प्रभावित परिवारों को सही चिकित्सकीय सलाह देना प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रशासन को घटना की परिस्थितियों की समीक्षा करके यह भी देखना चाहिए कि क्षेत्र में पशु नियंत्रण और स्वास्थ्य सहायता की व्यवस्था पर्याप्त है या नहीं।
निष्कर्ष: सरठेड़ी गांव में कुत्ते के हमले की घटना ने स्थानीय जनसुरक्षा और समय पर चिकित्सा सहायता की जरूरत को रेखांकित किया है। घायलों की स्थिति और प्रशासन की आगे की कार्रवाई की जानकारी सत्यापित होने पर खबर को अपडेट किया जाना चाहिए।

