हिसार में गांवों के विकास कार्यों पर ब्रेक, 70 करोड़ से ज्यादा भुगतान अटका; काम नहीं मिलने से मजदूर परेशान
309 पंचायतों में प्रभावित हुए विकास कार्य, पुरानी मनरेगा की बकाया राशि अब तक नहीं मिली; नई वीबी जी रामजी योजना को लेकर पंचायतों में असमंजस
हिसार। हिसार जिले के गांवों में विकास कार्यों की रफ्तार प्रभावित होने लगी है। पंचायतों को पुरानी योजना के तहत किए गए कार्यों का भुगतान नहीं मिलने और नई वीबी जी रामजी योजना के तहत पर्याप्त काम शुरू नहीं होने से स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। जिले की पंचायतों की करीब 70 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बकाया बताई जा रही है।
पंचायतों की ओर से पिछले वित्तीय वर्ष में कराए गए विभिन्न कार्यों का भुगतान लंबित है। इनमें नहरों की सफाई, जलघरों की सफाई, सड़कों की सफाई समेत ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े कई काम शामिल हैं। वहीं, पहले मनरेगा के तहत काम करने वाले कर्मचारियों की मजदूरी और वेतन से जुड़े भुगतान भी लंबित बताए जा रहे हैं।
309 पंचायतों में काम प्रभावित
हिसार जिले की 309 पंचायतों में ग्रामीण विकास से जुड़े कार्य कराए जाने हैं। पंचायत प्रतिनिधियों के अनुसार पिछले वित्तीय वर्ष में मनरेगा के तहत कई काम कराए गए थे, लेकिन उनकी राशि समय पर नहीं मिल सकी।
अब नई योजना लागू होने के बाद भी पुराने कामों के अनुरूप रोजगार उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसके कारण ग्रामीण मजदूर सरपंचों से काम की मांग कर रहे हैं, जबकि पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि नई योजना के तहत कार्यों का सही तरीके से निर्धारण और बंटवारा अभी पूरी तरह नहीं हो पाया है।
जल संरक्षण से जुड़े कार्यों पर नई योजना का जोर
सरपंचों का कहना है कि पुरानी मनरेगा व्यवस्था के तहत गांवों में कई तरह के स्थानीय कार्य कराए जाते थे। नई वीबी जी रामजी योजना में मुख्य रूप से जल संरक्षण जैसे कार्यों पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में पहले कराए जाने वाले कई कार्य अब उसी स्वरूप में नहीं हो पा रहे हैं।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों को नियमित काम नहीं मिल पा रहा है और पंचायतों के विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
70 करोड़ से ज्यादा भुगतान लंबित होने का दावा
जिला सरपंच एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष आजाद सिंह हिन्दुस्तानी के अनुसार, पुरानी मनरेगा योजना के तहत जिले में 70 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान अभी लंबित है। उनका कहना है कि काम और भुगतान दोनों प्रभावित होने से गांवों में मजदूरों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है।
उन्होंने बताया कि भुगतान और काम दोबारा शुरू कराने को लेकर पंचायत प्रतिनिधि मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक अपनी मांग रख चुके हैं, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
पहले तीन महीने में मिल जाता था भुगतान
पंचायत प्रतिनिधियों के अनुसार पहले गांवों में काम पूरा होने के बाद करीब तीन महीने के भीतर भुगतान मिलने की उम्मीद रहती थी। वित्तीय वर्ष 2025-26 में पंचायतों ने विभिन्न कार्य करवाए, लेकिन निर्धारित समय में भुगतान नहीं मिलने से पंचायतों पर वित्तीय दबाव बढ़ा है।
पुरानी व्यवस्था में काम की राशि में 60 प्रतिशत हिस्सा श्रम भुगतान और 40 प्रतिशत पंचायत के हिस्से के रूप में मिलने की बात कही गई है। भुगतान लंबित रहने के कारण पंचायतों के साथ-साथ काम करने वाले मजदूर भी प्रभावित हो रहे हैं।
फिलहाल पंचायत प्रतिनिधि बकाया भुगतान जारी करने और नई योजना के तहत ग्रामीणों को पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।





