साइबर अपराधियों पर उत्तराखंड पुलिस का बड़ा प्रहार, 10 गिरफ्तार; 1,236 एटीएम और 820 बैंक खातों की जांच !

देहरादून -: साइबर अपराधियों और उनके नेटवर्क के खिलाफ उत्तराखंड पुलिस ने प्रदेशव्यापी सात दिवसीय ‘ऑपरेशन हॉटस्पॉट’ चलाकर ठगी की रकम निकालने वालों से लेकर म्यूल बैंक खाते, संदिग्ध सिम, एटीएम, चेक निकासी केंद्र और सिम-पॉस उपलब्ध कराने वालों तक कार्रवाई की। अभियान के दौरान 820 संदिग्ध बैंक खातों का सत्यापन कर 159 एफआईआर दर्ज की गईं, जबकि 1,236 एटीएम निकासी मामलों या स्थानों की जांच के बाद 32 मुकदमे दर्ज हुए।
पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर 24 अगस्त से एक सितंबर तक संचालित अभियान में एसटीएफ, साइबर क्राइम यूनिट, जिला साइबर सेल और जनपद पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की। इससे पहले एक से 31 जुलाई तक चलाए गए साइबर सुरक्षा अभियान के दौरान डिजिटल, टेलीकॉम और वित्तीय संकेतकों का तकनीकी विश्लेषण कर संदिग्ध हॉटस्पॉट चिह्नित किए गए थे। आई4सी, दूरसंचार विभाग, भारतीय रिजर्व बैंक और अन्य संस्थाओं से प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण कर तैयार की गई खुफिया जानकारी के आधार पर मैदानी कार्रवाई की गई।
अभियान में 84 चेक निकासी मामलों या स्थानों का सत्यापन कर 37 एफआईआर दर्ज की गईं। 22 संदिग्ध सिम-पॉस का सत्यापन करते हुए 10 मुकदमे दर्ज किए गए। साइबर अपराध में इस्तेमाल पाए गए 644 सिम और 630 आईएमईआई ब्लॉक कराए गए, जबकि 442 संदिग्ध मामलों का सत्यापन किया गया। पुलिस ने साइबर ठगी की पूरी श्रृंखला पर कार्रवाई करते हुए ठगी करने वालों, रकम प्राप्त करने और निकालने वालों तथा साइबर अपराध में इस्तेमाल संसाधन उपलब्ध कराने वाले लोगों को जांच के दायरे में लिया।
ऑपरेशन के दौरान हरिद्वार के श्यामपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने म्यूल खातों, एटीएम निकासी, संदिग्ध सिम और चेक निकासी से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण कर संगठित साइबर नेटवर्क ‘नवादा ग्रुप’ का पर्दाफाश किया। पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में 200 से अधिक बैंक खातों में साइबर ठगी की रकम के लेयर-वन लेनदेन का पता चला। आरोपियों के कब्जे से 45 से अधिक एटीएम कार्ड, 20 बैंक पासबुक, दो लैपटॉप और 17 मोबाइल फोन बरामद किए गए।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि लोन, ऑनलाइन ट्रेडिंग और रकम दोगुनी करने का झांसा देकर की गई ठगी की राशि म्यूल खातों में जमा कराई जाती थी। इसके बाद एटीएम से नकदी निकालने और सीडीएम के माध्यम से दूसरे खातों में राशि जमा या स्थानांतरित कर मनी ट्रेल तोड़ने का प्रयास किया जाता था। मामले में मथुरा में भी गिरफ्तारी हुई है, जबकि नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की नवादा, बिहार में तलाश की जा रही है।
हरिद्वार के पथरी थाना क्षेत्र में एटीएम निकासी के आंकड़ों के आधार पर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच में पता चला कि उनके खातों में साइबर ठगी की लेयर-वन रकम जमा होती थी, जिसे वे पांच प्रतिशत कमीशन लेकर एटीएम से निकालते थे। पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार में क्वांटम कैपिटल कंपनी के माध्यम से फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर 3.86 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में फरार आरोपी आशीष रिचर्ड को भी पुलिस ने एक सितंबर को पौड़ी से गिरफ्तार किया। जांच में आरोपी के आठ बैंक खातों में करीब 1.50 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की राशि पहुंचने की जानकारी मिली है। इनमें करीब सात लाख रुपये फ्रीज कराए गए हैं। आरोपी के खिलाफ साइबर पोर्टल पर कोलकाता, काशी, कर्नाटक, अमृतसर और तमिलनाडु समेत विभिन्न स्थानों से 19 शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें करीब 32.18 लाख रुपये की धनराशि संबंधित है।
उत्तराखंड पुलिस ने वर्ष 2026 में 240 साइबर अपराधियों और संदिग्धों का विवरण आई4सी के समन्वय पोर्टल पर अपलोड किया। इनके अन्य राज्यों में दर्ज साइबर अपराधों से मिलान के बाद 100 से अधिक अंतरराज्यीय कड़ियां सामने आई हैं। इनके आधार पर संबंधित राज्यों के साथ समन्वय कर संदिग्धों का सत्यापन, आपराधिक इतिहास का मिलान और गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा रही है।
साइबर मामलों की जांच में अंतरराज्यीय सहयोग के लिए सीआईएआर के माध्यम से उत्तराखंड पुलिस ने अन्य राज्यों को बीएनएसएस की धारा 35(3) के तहत 303 नोटिस भेजे, जबकि दूसरे राज्यों से प्राप्त 247 नोटिस की उत्तराखंड में तामीली कराई गई। पुलिस के अनुसार वर्ष 2026 में 1930 हेल्पलाइन और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर प्राप्त 18,749 शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए पुलिस, बैंकों और वित्तीय संस्थानों के समन्वय से करीब 23.44 करोड़ रुपये की ठगी की रकम होल्ड या सेव कराई गई। प्राप्त 683 ई-जीरो एफआईआर में से 659 को नियमित एफआईआर में परिवर्तित या लिंक किया गया। साइबर अपराध से जुड़े पहले दो प्रगति रिव्यू में उत्तराखंड ने क्रमश: पांचवां और चौथा स्थान हासिल किया। दूसरी प्रगति समीक्षा में राज्य देशभर में चौथे स्थान पर रहा।
प्रवर्तन के साथ साइबर जागरूकता पर भी पुलिस ने जोर दिया। 27 अगस्त को आयोजित वर्चुअल साइबर जागरूकता कार्यक्रम में प्रदेश के 1,100 से अधिक राजकीय विद्यालयों के करीब 1.75 लाख विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यार्थियों को एआई और डीपफेक, साइबर बुलिंग, सेक्सटॉर्शन, ऑनलाइन गेमिंग, डिजिटल अरेस्ट, निवेश ठगी, सोशल मीडिया सुरक्षा और 1930 हेल्पलाइन के बारे में जानकारी दी गई।
एक जनवरी से 30 अगस्त तक प्रदेश में 5,688 विद्यालयों, महाविद्यालयों और व्यावसायिक संस्थानों, 3,423 जागरूकता शिविरों, 4,810 सार्वजनिक स्थानों, 151 नुक्कड़ नाटकों, 2,782 सोशल मीडिया अभियानों और 3,680 स्कूल-कॉलेज कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूकता फैलाई गई। इस दौरान 23,238 वरिष्ठ नागरिकों को भी जागरूक किया गया। पुलिस ने दो सितंबर को चिन्हित म्यूल खाताधारकों को पुलिस लाइन और थानों में बुलाकर काउंसलिंग की तथा बैंक खाते, यूपीआई और मोबाइल नंबर के दुरुपयोग से बचने की जानकारी दी। वहीं तीन सितंबर को देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर और नैनीताल के चिन्हित साइबर हॉटस्पॉट क्षेत्रों में करीब दो हजार पुलिसकर्मियों की मदद से विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान 300 से अधिक संदिग्धों को पूछताछ के लिए निरुद्ध कर खातों, मोबाइल और सिम की जांच की गई।
पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के निर्देश पर एसटीएफ ने स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन हॉटस्पॉट के बाद भी साइबर अपराधियों, म्यूल खातों, संदिग्ध बैंक खातों, सिम-पॉस और अन्य डिजिटल संसाधनों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। आमजन से साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई है।