हरियाणा

तलाक के बाद भी बच्चे का पिता की संपत्ति और सेवा लाभों पर अधिकार बरकरार, पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

हाई कोर्ट ने कहा कि तलाक से पिता और बच्चे का कानूनी रिश्ता समाप्त नहीं होता। पहली पत्नी से जन्मे बच्चे को भी दूसरी पत्नी की संतान के समान सेवा संबंधी लाभों में अधिकार मिलेगा

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि माता-पिता के तलाक के बाद भी बच्चे का अपने पिता से कानूनी संबंध समाप्त नहीं होता। अदालत ने कहा कि तलाक केवल पति-पत्नी के वैवाहिक रिश्ते को खत्म करता है, लेकिन इससे बच्चे के वैधानिक अधिकार प्रभावित नहीं होते।

हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार के एक दिवंगत कर्मचारी से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। अदालत ने उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें पहली पत्नी से जन्मे नाबालिग पुत्र को दूसरी पत्नी की संतान के बराबर अनुकंपा वित्तीय सहायता का पात्र माना गया था।

मामले के अनुसार, सरकारी कर्मचारी का पहला विवाह हुआ था, जिससे एक पुत्र का जन्म हुआ। बाद में दोनों के बीच आपसी सहमति से तलाक हो गया। इसके बाद कर्मचारी ने दूसरा विवाह किया और दूसरी संतान हुई। कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु के बाद अनुकंपा वित्तीय सहायता के वितरण को लेकर विवाद पैदा हुआ।

शुरुआत में पूरी सहायता दूसरी पत्नी को स्वीकृत की गई थी। इसके बाद पहली पत्नी ने अपने नाबालिग पुत्र की ओर से अधिकार का दावा किया। सक्षम प्राधिकारी ने हरियाणा सिविल सेवा नियम, 2019 के तहत बच्चे को भी समान रूप से पात्र माना, जिसके खिलाफ दूसरी पत्नी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की।

सुनवाई के दौरान दूसरी पत्नी ने तर्क दिया कि तलाक के समय पहली पत्नी को स्थायी गुजारा भत्ता मिल चुका था और बच्चे की अभिरक्षा भी उसी के पास थी। अदालत ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए कहा कि गुजारा भत्ता या भरण-पोषण के लिए दी गई राशि किसी बच्चे के वैधानिक अधिकारों को समाप्त नहीं कर सकती।

हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित सेवा नियमों में ‘आश्रित बच्चा’ नहीं बल्कि ‘पात्र बच्चा’ शब्द का उपयोग किया गया है। इसलिए पात्रता रखने वाले बच्चे को केवल तलाक या अभिरक्षा के आधार पर सेवा संबंधी लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता।

अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि पैतृक या कृषि संपत्ति में उत्तराधिकार का अधिकार और सरकारी सेवा नियमों के तहत मिलने वाली अनुकंपा वित्तीय सहायता अलग-अलग कानूनी विषय हैं। किसी एक अधिकार का होना या न होना दूसरे वैधानिक अधिकार को प्रभावित नहीं करता।

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