लखनऊ

कोचिंग, अस्पताल और होटलों पर प्रशासन की सख्ती, लेकिन बड़ा सवाल—क्या जांच सिर्फ औपचारिकता या होगी असली कार्रवाई ?

लखनऊ -: लखनऊ में कोचिंग सेंटर में हुई भीषण अग्निकांड की घटना के बाद प्रदेशभर में सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड में है। इसी क्रम में शुक्रवार को कालपी नगर में उपजिलाधिकारी अमित शेखर एवं क्षेत्राधिकारी राजेश कमल के नेतृत्व में प्रशासन की संयुक्त टीम ने कोचिंग सेंटरों, निजी अस्पतालों और होटलों का सघन निरीक्षण किया। अभियान के दौरान कई संस्थानों में सुरक्षा संबंधी कमियां सामने आईं, जिन पर संचालकों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए। एसडीएम-सीओ की संयुक्त टीम ने सुरक्षा व्यवस्थाएं परखी, खामियां मिलने पर दिए सुधार के निर्देश; लोगों की निगाहें अब कार्रवाई पर |

निरीक्षण दल में तहसीलदार अभिनव कुमार तिवारी, अग्निशमन विभाग, विद्युत विभाग तथा नगर पालिका के अधिकारी भी शामिल रहे। टीम ने सबसे पहले टरननगंज स्थित आईसीएल कंप्यूटर सेंटर का निरीक्षण किया, जहां फायर सिलेंडर, फायर अलार्म, आपातकालीन निकास (एग्जिट गेट), विद्युत वायरिंग और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं का बारीकी से परीक्षण किया गया। जहां-जहां कमियां मिलीं, वहां तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए। इसके बाद टीम आलमपुर स्थित किलकारी हॉस्पिटल पहुंची, जहां अस्पताल में अग्निशमन उपकरण, विद्युत सुरक्षा, मरीजों के सुरक्षित निकास और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की जांच की गई।

अस्पताल प्रबंधन को सभी निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। संयुक्त टीम ने न्यू रुद्राक्ष रेस्टोरेंट और जोल्हूपुर मोड़ स्थित मून राइज रेस्टोरेंट का भी निरीक्षण किया। यहां भी अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता, विद्युत सुरक्षा, आपातकालीन निकास और अन्य सुरक्षा इंतजामों की जांच की गई। एसडीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी संस्थान अग्निशमन विभाग एवं विद्युत विभाग से आवश्यक एनओसी प्राप्त करें और सुरक्षा मानकों का हर हाल में पालन सुनिश्चित करें।

हालांकि इस अभियान के बीच स्थानीय स्तर पर कई सवाल भी उठ रहे हैं। नगर में कुछ निजी अस्पतालों को लेकर समय-समय पर विभिन्न प्रकार की शिकायतें सामने आती रही हैं। कुछ लोगों का दावा है कि कुछ अस्पतालों में प्रसूता महिलाओं और नवजात शिशुओं के उपचार संबंधी व्यवस्थाओं पर सवाल उठते रहे हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि ऐसी शिकायतें हैं तो उनकी निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच होना जरूरी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई केवल निरीक्षण, नोटिस या चेतावनी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जिन संस्थानों में गंभीर अनियमितताएं या सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाए,

वहां नियमों के अनुसार प्रभावी कार्रवाई भी होनी चाहिए। विशेषज्ञों का भी मानना है कि फायर सेफ्टी, भवन सुरक्षा, पार्किंग, विद्युत सुरक्षा और आपातकालीन निकास जैसी व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन का यह अभियान स्थायी सुधार की दिशा में आगे बढ़ता है या फिर केवल औचक निरीक्षण तक सीमित रह जाएगा। यदि सुरक्षा मानकों का ईमानदारी से पालन सुनिश्चित कराया गया तो इससे विद्यार्थियों, मरीजों और आम नागरिकों की सुरक्षा मजबूत होगी तथा संभावित दुर्घटनाओं की आशंका भी काफी हद तक कम की जा सकेगी।

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