हरियाणा में खाद वितरण का नया सिस्टम लागू, अब QR कोड और आधार सत्यापन के बाद मिलेगी डीएपी-यूरिया
कालाबाजारी रोकने और वास्तविक किसानों तक उर्वरक पहुंचाने के लिए सरकार की नई पहल, तीन जिलों में शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
पंचकूला:हरियाणा सरकार ने किसानों को मिलने वाले उर्वरकों के वितरण को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। अब डीएपी, यूरिया और अन्य खादों की खरीद के दौरान किसानों का आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन और क्यूआर कोड प्रणाली का उपयोग किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य कालाबाजारी पर रोक लगाना और यह सुनिश्चित करना है कि सब्सिडी वाले उर्वरक वास्तविक किसानों तक ही पहुंचें।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, नई व्यवस्था को शुरुआती चरण में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में तीन जिलों—यमुनानगर, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़—में लागू किया जाएगा। इन क्षेत्रों का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि यहां खाद वितरण में अनियमितताओं और अवैध बिक्री से जुड़ी शिकायतें अधिक सामने आई थीं।
अधिकारियों का कहना है कि जांच में ऐसे मामले सामने आए थे, जिनमें हरियाणा के किसानों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उर्वरकों को पड़ोसी राज्यों में बेचे जाने की आशंका जताई गई थी। नई तकनीक आधारित प्रणाली से ऐसे मामलों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
नई व्यवस्था के तहत किसान को खाद प्राप्त करते समय क्यूआर कोड स्कैन कराना होगा और आधार आधारित पहचान सत्यापन से गुजरना होगा। यदि किसी कारणवश क्यूआर कोड स्कैन नहीं हो पाता, तो किसान आधार संख्या या आवेदन संख्या के माध्यम से भी अपनी पहचान सत्यापित कर सकेगा।
सरकार का मानना है कि यह कदम वैश्विक परिस्थितियों और उर्वरक आपूर्ति पर पड़ रहे संभावित प्रभावों को देखते हुए भी महत्वपूर्ण है। इससे उपलब्ध खाद का बेहतर प्रबंधन और निष्पक्ष वितरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
कृषि विभाग जल्द ही इस नई व्यवस्था को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगा। पायलट प्रोजेक्ट के परिणाम संतोषजनक रहने पर इसे पूरे हरियाणा में लागू करने की योजना है।





