भाजपा में शामिल सांसदों को वापस बुलाने की मांग पर सियासी घमासान
मुख्यमंत्री भगवंत मान के फैसले पर सवाल, अकाली दल ने दलबदल कानून और नैतिकता पर उठाए गंभीर मुद्दे
चंडीगढ़ / 25 अप्रैल:पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए राज्यसभा सांसदों को वापस बुलाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के कदम पर शिरोमणि अकाली दल ने कड़ा विरोध जताया है। पार्टी ने इसे “राजनीतिक नौटंकी” करार देते हुए संवैधानिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
अकाली दल के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने एक प्रेस बयान में कहा कि सांसदों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार राष्ट्रपति के पास नहीं, बल्कि संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दलबदल विरोधी कानून के तहत यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य किसी अन्य दल में शामिल हो जाते हैं, तो उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती।
⚖️ संवैधानिक प्रक्रिया पर बहस
डॉ. चीमा ने कहा कि मुख्यमंत्री को इस मुद्दे पर नैतिकता की बात करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी आम आदमी पार्टी ने अकाली दल के विधायकों को अपने दल में शामिल किया था और उन्हें महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया गया।
🏛️ AAP पर लगाए सवाल
अकाली नेता ने आम आदमी पार्टी से यह भी सवाल किया कि उसने राज्यसभा के लिए “बाहरी और धनाढ्य व्यक्तियों” को क्यों नामित किया, बजाय पंजाब के आम लोगों के प्रतिनिधियों को आगे बढ़ाने के। उन्होंने जवाबदेही के मुद्दे पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि क्या जनता को अपने विधायकों को वापस बुलाने का अधिकार मिलना चाहिए, या यह सिद्धांत केवल चुनिंदा मामलों में ही लागू होता है।
🗳️ नए जनादेश की मांग
डॉ. चीमा ने सुझाव दिया कि प्रतीकात्मक कदम उठाने के बजाय आम आदमी पार्टी को जनता के बीच जाकर विश्वास बहाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखती है, तो उसे राज्यपाल से नए जनादेश की मांग करनी चाहिए।
📊 राजनीतिक असर
इस मुद्दे ने पंजाब की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जहां संवैधानिक अधिकार, दलबदल कानून और राजनीतिक नैतिकता को लेकर अलग-अलग दलों के बीच टकराव देखने को मिल रहा है। आने वाले समय में यह विवाद और गहरा सकता है, खासकर जब चुनावी माहौल नजदीक हो।





