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लीवर सिरोसिस का बढ़ता खतरा: सिर्फ लीवर नहीं, पूरे शरीर पर पड़ रहा असर

लीवर सिरोसिस के मरीजों में मांसपेशियों की कमजोरी बढ़ रही; समय पर इलाज और फिजियोथैरेपी बेहद जरूरी

नारी डेस्क: आजकल लीवर से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, जिनमें लीवर सिरोसिस एक गंभीर समस्या बनकर सामने आ रही है। यह बीमारी केवल लीवर तक सीमित नहीं रहती, बल्कि धीरे-धीरे पूरे शरीर को प्रभावित करने लगती है। हरियाणा के फरीदाबाद सहित कई इलाकों में इसके मरीजों की संख्या बढ़ती देखी जा रही है।

क्या होता है असर?
विशेषज्ञों के अनुसार, सिरोसिस के मरीजों में मांसपेशियां तेजी से कमजोर होने लगती हैं। इस स्थिति को सार्कोपेनिया कहा जाता है, जिसमें मांसपेशियों का द्रव्यमान, ताकत और कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। आमतौर पर यह समस्या 40 वर्ष की आयु के बाद ज्यादा देखने को मिलती है।

इस कारण मरीज को कमजोरी, संतुलन बिगड़ना, बार-बार गिरने का खतरा और रोजमर्रा के काम करने में कठिनाई जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

डॉक्टर क्या कहते हैं?
डॉक्टरों के मुताबिक, ऐसे मरीजों को हाथ-पैरों में कमजोरी, जल्दी थकान और कई बार सांस फूलने जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। ये संकेत बताते हैं कि शरीर की मसल्स तेजी से कमजोर हो रही हैं।

सिर्फ दवाइयों के सहारे इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित करना संभव नहीं है। मरीज की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए फिजियोथैरेपी की अहम भूमिका होती है। समय रहते सही तरीके से फिजियोथैरेपी शुरू करने पर मरीज को काफी राहत मिल सकती है।

चलने-फिरने में आती है दिक्कत:
लीवर सिरोसिस के मरीजों को अक्सर चलने-फिरने में परेशानी, शरीर में कमजोरी और संतुलन की समस्या होती है। ऐसे में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, बैलेंस और को-ऑर्डिनेशन से जुड़ी एक्सरसाइज काफी फायदेमंद साबित होती हैं।

इसके अलावा, नियमित व्यायाम शरीर में बढ़े हुए अमोनिया स्तर को कम करने में भी मदद करता है, जो इस बीमारी में एक महत्वपूर्ण कारक है।


निष्कर्ष:
लीवर सिरोसिस एक गंभीर बीमारी है, जो समय के साथ पूरे शरीर को प्रभावित कर सकती है। सही समय पर पहचान, उचित इलाज और फिजियोथैरेपी के जरिए मरीज की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है।

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