पंजाब में हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट पर सवाल, नियमों को दरकिनार कर प्रिंसिपल की नियुक्ति
एसोसिएट प्रोफेसर की मंजूरी से पहले ही मिला प्रिंसिपल पद, UGC नियमों के उल्लंघन के आरोप
Punjab:पंजाब सरकार के हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट (एजुकेशन डिपार्टमेंट ) से जुड़ा एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और नियमों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक व्यक्ति को एडेड कॉलेज में प्रिंसिपल के पद पर मंजूरी दे दी गई, जबकि वह उस समय तक एसोसिएट प्रोफेसर के पद के लिए भी योग्य घोषित नहीं हुआ था।
जानकारी के मुताबिक, संबंधित व्यक्ति को 1 जून 2020 को प्रिंसिपल के तौर पर अप्रूव किया गया। हैरानी की बात यह है कि उसे एसोसिएट प्रोफेसर के पद के लिए मंजूरी करीब 10 महीने बाद, 24 मार्च 2021 को दी गई। यह क्रम उच्च शिक्षा से जुड़े स्थापित नियमों के विपरीत माना जा रहा है।
इस मुद्दे को उठाते हुए एसोसिएशन ऑफ यूनाइटेड कॉलेज टीचर्स, पंजाब और चंडीगढ़ (AUCT) के प्रधान प्रोफेसर तरुण घई ने कहा कि यह नियुक्ति यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के 2010 और 2018 के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। नियमों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को प्रिंसिपल बनने से पहले यूनिवर्सिटी के अनुमोदित चयन पैनल के माध्यम से एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में नियुक्त होना अनिवार्य है।
प्रोफेसर घई ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति के पास आज तक संबंधित यूनिवर्सिटी से एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में वैध मंजूरी नहीं है। उन्होंने इस पूरे मामले को शिक्षा विभाग की विश्वसनीयता पर गंभीर आघात बताया।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में सभी तथ्यों को डायरेक्टर, हायर एजुकेशन, पंजाब को पहले ही सौंपा जा चुका है। विभाग की साख बनाए रखने के लिए जरूरी है कि इस मामले में तुरंत जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए।
एसोसिएशन की मांग है कि संबंधित व्यक्ति को प्रिंसिपल पद से हटाया जाए, कॉलेज से पिछले वर्षों में दिए गए वेतन व अन्य लाभों की रिकवरी की जाए, और इस प्रक्रिया में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।




