हरियाणा में ‘नो-रिस्क’ नीति लागू: बैंक घोटालों के बाद अधिकारियों पर सख्ती
बाहरी संपर्कों का रिकॉर्ड अनिवार्य, मौखिक आदेशों पर रोक और गिफ्ट स्वीकारने पर ‘रेड अलर्ट’
Haryana:हरियाणा में हाल ही में सामने आए बैंक घोटालों के बाद सरकार ने प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी दिशा में अधिकारियों के लिए ‘नो-रिस्क’ नीति लागू करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
इस नई कार्यसंस्कृति का उद्देश्य भ्रष्टाचार की संभावनाओं को खत्म करना और सरकारी कामकाज को पूरी तरह व्यवस्थित व ट्रैक करने योग्य बनाना है। शुरुआती रिपोर्टों में यह संकेत मिले हैं कि कुछ मामलों में अधिकारियों और निजी संस्थाओं के बीच असामान्य संपर्क के कारण वित्तीय अनियमितताएं हुईं।
🔍 नया फोकस: हर संपर्क दर्ज, हर फैसला ट्रैक
नई व्यवस्था के तहत अब अधिकारियों को अपने सभी बाहरी संपर्कों का पूरा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। किसी भी निजी व्यक्ति, कंपनी या प्रतिनिधि से पहली मुलाकात का विवरण दर्ज करना जरूरी किया जाएगा।
इसके अलावा, सभी आधिकारिक संवाद केवल ईमेल या अन्य प्रमाणिक माध्यमों से ही करने के निर्देश दिए गए हैं। अनजान नंबर से आने वाले कॉल या संदेशों को बिना सत्यापन के नजरअंदाज करने की सलाह दी गई है, ताकि साइबर फ्रॉड और दबाव से बचा जा सके।
🚨 उपहार और निमंत्रण पर ‘रेड अलर्ट’
अधिकारियों को बिना अनुमति किसी भी प्रकार का उपहार स्वीकार करने से मना किया गया है। निजी कार्यक्रमों में शामिल होने से पहले भी सावधानी बरतने को कहा गया है, ताकि हितों के टकराव की स्थिति न बने।
साथ ही, अपरिचित लोगों के साथ फोटो खिंचवाने से बचने की भी सलाह दी गई है।
📄 मौखिक आदेशों पर रोक
नीति का एक अहम पहलू मौखिक आदेशों पर पूरी तरह रोक लगाना है। अब किसी भी कार्य को केवल “ऊपर से निर्देश” के आधार पर नहीं किया जाएगा। हर निर्णय के लिए लिखित आदेश या आधिकारिक दस्तावेज अनिवार्य होंगे।
🔐 संवेदनशील जानकारी पर सख्त नियंत्रण
सरकारी गोपनीय सूचनाओं को लेकर भी सख्त नियम लागू किए गए हैं। अब कोई भी संवेदनशील जानकारी केवल अधिकृत चैनलों के माध्यम से ही साझा की जाएगी। निजी मोबाइल, सोशल मीडिया या अनौपचारिक प्लेटफॉर्म पर सरकारी मामलों की चर्चा पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।
🎓 प्रशिक्षण और सतर्कता तंत्र मजबूत
सरकार अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करेगी, जिसमें साइबर सुरक्षा, नैतिक प्रशासन और जोखिम प्रबंधन जैसे विषय शामिल होंगे।
इसके साथ ही, किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों या सतर्कता विभाग को देना अनिवार्य किया गया है।
✔️ ‘न’ कहना भी जिम्मेदारी
इस नीति का एक महत्वपूर्ण संदेश यह है कि अधिकारियों को जरूरत पड़ने पर स्पष्ट रूप से ‘न’ कहने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि वे किसी भी गलत या संदिग्ध दबाव से बच सकें।





