पंजाब में गेहूं खरीद पर सियासी संग्राम: अकाली दल का AAP सरकार पर बड़ा हमला
“मंडियों में फसल पड़ी लावारिस, विधायक कर रहे फोटोशूट” – ब्रह्मपुरा ने दस्तावेजों के साथ उठाए सवाल
जैतों: पंजाब में गेहूं खरीद को लेकर सियासत तेज हो गई है। शिरोमणि अकाली दल (अकाली दल )के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक रविंद्र सिंह ब्रह्मपुरा ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य की मंडियों में किसानों की फसल बदहाल स्थिति में पड़ी है, जबकि सरकार केवल दिखावे में व्यस्त है।
ब्रह्मपुरा ने दावा किया कि सरकारी दस्तावेज साफ बताते हैं कि पंजाब सरकार ने गेहूं खरीद से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया समय पर शुरू नहीं की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 9 अप्रैल को पत्र जारी किया, जिसे 16 अप्रैल को भारतीय खाद्य निगम (FCI) पंजाब ने आगे बढ़ाया और अंततः 17 अप्रैल को केंद्र सरकार से मंजूरी मिली।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब 17 अप्रैल तक खरीद की प्रक्रिया को लेकर अंतिम स्वीकृति ही नहीं मिली थी, तो सत्ताधारी पार्टी के विधायक मंडियों में जाकर किसानों को क्या भरोसा दे रहे थे। उनके अनुसार, यही कारण है कि खडूर साहिब सहित कई इलाकों की मंडियों में किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
“जमीनी हकीकत बनाम फोटो पॉलिटिक्स”
ब्रह्मपुरा ने आरोप लगाया कि सरकार के प्रतिनिधि जमीनी समस्याओं को सुलझाने के बजाय केवल फोटो सेशन में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याएं बढ़ रही हैं और हाल ही में कुछ विधायकों को विरोध का सामना भी करना पड़ा है।
केंद्र की मंजूरी, लेकिन शर्तों के साथ
ब्रह्मपुरा ने यह भी बताया कि 17 अप्रैल को केंद्र सरकार ने गेहूं खरीद में कुछ छूट देने की अनुमति दी है। इसके तहत कम चमक वाले गेहूं पर 70% तक और सिकुड़े दानों पर 15% तक छूट दी गई है।
हालांकि, इस मंजूरी के साथ एक अहम शर्त भी जुड़ी है—इस छूट से होने वाला पूरा आर्थिक नुकसान और अतिरिक्त खर्च पंजाब सरकार को ही उठाना होगा।
क्या है पूरा विवाद?
यह मामला राज्य सरकार की तैयारी, केंद्र से मंजूरी में देरी और किसानों की वास्तविक स्थिति को लेकर उठे सवालों से जुड़ा है। विपक्ष इसे सरकार की नाकामी बता रहा है, जबकि सरकार की ओर से अभी तक इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।





