नारनौल: हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में स्टोन क्रशिंग उद्योग (क्रशिंग उद्योग )मुश्किल दौर से गुजर रहा है। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) ने अटेला और नांगल चौधरी क्षेत्र में संचालित 500 से अधिक क्रशर यूनिट्स के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। इन इकाइयों पर बिजली बिल का 100 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया बताया जा रहा है।
🚨 कुर्की और नीलामी की चेतावनी
बिजली विभाग के अनुसार, कई बार नोटिस देने के बावजूद बकाया जमा नहीं कराया गया। अब जिन उपभोक्ताओं का बिल 1 लाख रुपये से अधिक है:
- उनके बिजली कनेक्शन काटे जाएंगे
- संपत्ति कुर्क कर नीलामी की कार्रवाई भी हो सकती है
🏗️ निर्माण कार्यों पर पड़ेगा असर
अगर बड़ी संख्या में क्रशर बंद होते हैं, तो:
- रोड़ी, बजरी और डस्ट की कमी हो सकती है
- निर्माण सामग्री महंगी हो सकती है
- मकान और अन्य निर्माण कार्यों की लागत बढ़ेगी
👷 मजदूरों पर भी संकट
इस उद्योग से जुड़े हजारों मजदूर, ट्रक ड्राइवर और अन्य कामगारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।
📉 क्रशर मालिकों की दलील
क्रशर संचालकों का कहना है कि:
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के सख्त नियम
- माइनिंग पर पाबंदियां
- आर्थिक मंदी
की वजह से उद्योग पहले ही नुकसान में है। उन्होंने सरकार से बिजली बिल पर सरचार्ज माफ करने और किस्तों में भुगतान की सुविधा देने की मांग की है।
⭐ क्यों अहम है यह मुद्दा?
- उद्योग और रोजगार पर सीधा असर
- निर्माण सेक्टर में महंगाई बढ़ने की आशंका
- सरकार और उद्योग के बीच टकराव की स्थिति
यह मामला आने वाले दिनों में और गंभीर हो सकता है, अगर समाधान नहीं निकला तो इसका असर पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर दिख सकता है।





