कफ सिरप प्रकरण में जौनपुर में ईडी का आकस्मिक छापा !
जौनपुर -: डीन कफ सिरप की अवैध बिलिंग से संबंधित मामले में की गई है। ईडी की टीम ने सीएमओ कार्यालय के सामने स्थित एक आवास पर आज प्रातः करीब 9:00 बजे से ही दबिश दी है। यह मामला उत्तर प्रदेश के कई जिलों में कोडीन कफ सिरप की बड़ी मात्रा में बरामदगी के बाद शुरू हुई जांच से जुड़ा है। इस जांच की जानकारी बीते 20 नवंबर को सामने आई थी। नवंबर में हुई छापेमारी के दौरान, जिले की कई मेडिकल एजेंसियों से प्रतिबंधित सिरप की बड़ी खेप जब्त की गई थी। इनमें निगम मेडिकल एजेंसीज, ओलंदगंज के मालिक देवेश कुमार दुबे के यहां से 21 हजार बोतलें, एसएन मेडिकल एजेंसी, मुफ्ती मोहल्ला की मालिक महरून निशा के यहां से 18 हजार बोतलें और केदार मेडिकल एजेंसी, उदपुर, नौपेडवा से सर्वाधिक 62,250 बोतलें शामिल थीं।
नवंबर में हुई छापेमारी के दौरान, जिले की कई मेडिकल एजेंसियों से प्रतिबंधित सिरप की बड़ी खेप जब्त की गई थी। इनमें निगम मेडिकल एजेंसीज, ओलंदगंज के मालिक देवेश कुमार दुबे के यहां से 21 हजार बोतलें, एसएन मेडिकल एजेंसी, मुफ्ती मोहल्ला की मालिक महरून निशा के यहां से 18 हजार बोतलें और केदार मेडिकल एजेंसी, उदपुर, नौपेडवा से सर्वाधिक 62,250 बोतलें शामिल थीं। कफ सिरप रैकेट की शुरुआत 18 अक्टूबर को सोनभद्र में दीपावली के दौरान हुई कार्रवाई से हुई, जब नमकीन से भरे ट्रक के बीच 1.19 लाख शीशियां छिपी मिलीं।
इसके बाद गिरफ्तारी और पूछताछ का सिलसिला बढ़ता गया और नेटवर्क के गहरे तार रांची, गाजियाबाद, मेरठ, लखनऊ, वाराणसी, बहराइच, जौनपुर और बांग्लादेश तक जुड़े मिले।स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, फेन्सिडिल सिरप से किसी की मौत का अब तक कोई प्रमाण नहीं है, लेकिन इसका नशे के रूप में बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा था। कफ सिरप रैकेट का अनुमानित कारोबार 2,000 करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है। अब तक दर्ज 128 एफआईआर फार्मा फर्मों के रिकॉर्ड, बैंकिंग ट्रांजैक्शन और आरोपी कंपनियों के पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है। लखनऊ और प्रयागराज की टीमें इस केस को अब तक की सबसे बड़ी फार्मा-नारकोटिक्स फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन के रूप में आगे बढ़ा रही हैं।

