370 हटने की बरसी पर ढोल बजाकर नाचे पाक से आए शरणार्थी

जम्मू: जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने की दूसरी बरसी पर यूं तो केंद्र शासित प्रदेश में कई आयोजन हुए, लेकिन सबसे ज्यादा खुशी पश्चिमी पाकिस्तान से भारत आए शरणार्थियों की कॉलोनी में थी। गुरुवार को पश्चिम पाकिस्तान से आए शरणार्थी ढोल की थापों पर नाचते नजर आए। ‘भारत माता की जय’ के बीच उन्होंने कहा कि 5 अगस्त, 2019 का दिन हमारे लिए असली आजादी लेकर आया था। उन्होंने कहा कि आर्टिकल 370 और 35ए को हटाए जाने से हमें नागरिकता के अधिकार मिले हैं और अब हम भी जम्मू कश्मीर के गर्वित नागरिक हैं।
पाकिस्तान रिफ्यूजी एक्शन कमिटी के प्रेसिडेंट लाबा राम गांधी के नेतृत्व में शरणार्थी परिवारों के लोग एकत्र हुए और तिरंगा फहराकर जश्न मनाया। लाबा राम गांधी ने कहा, ‘हम इसे अपनी आजादी के दिन के तौर पर मना रहे हैं क्योंकि जम्मू-कश्मीर में रहते हुए हमें असली आजादी 5 अगस्त, 2019 को ही दी गई थी।’ 5 अगस्त 2019 को ही केंद्र सरकार ने संविधान में संशोधन करते हुए आर्टिकल 370 और 35ए को हटा दिया था। इसके अलावा जम्मू कश्मीर और लद्दाख को अलग करते हुए दो केंद्र शासित प्रदेशों के तौर पर गठन किया गया है। कश्मीर के मूल निवासी का स्टेटस पाने वाले शरणार्थियों का कहना है कि वह दिन हमारे लिए सही मायनों में आजादी लेकर आया था।
पीएम मोदी और अमित शाह को दिया धन्यवाद, कहा- अब हमें भी अधिकार मिले
लाबा राम गांधी समेत शरथार्थी परिवारों के लोगों ने कहा कि हम इसके लिए पीएम नरेंद्र मोदी और होम मिनिस्टर अमित शाह को धन्यवाद देते हैं। गांधी ने कहा, ‘हम जम्मू-कश्मीर में अवांछित लोगों की तरह रह रहे थे। हमारे कोई अधिकार नहीं थे। न वोट दे सकते थे और न ही नौकरियां मिल सकती थीं। अब हम यहां के नागरिक हैं। हमारे बच्चों के पास भी अन्य लोगों की तरह सारे अधिकार हैं।’ बता दें कि 5 अगस्त, 2019 से पहले तक पश्चिम पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को संसदीय चुनावों के अलावा किसी भी स्तर के इलेक्शन में वोटिंग का अधिकार नहीं था। इसके अलावा सरकारी नौकरी, स्कॉलरशिप और कॉलेजों में एडमिशन भी नहीं ले सकते थे।
पाक के हिस्से वाले पश्चिमी पंजाब और गुजरात से भागकर आए थे जम्मू कश्मीर
इनमें से ज्यादातर परिवार पश्चिमी पंजाब और गुजरात के हिस्सों से आए थे, जो अब पाकिस्तान में हैं। अब इनकी संख्या एक लाख के करीब है। इसके अलावा एक दौर में पंजाब से आए दलित समुदाय के लोगों की भी शिकायत थी कि उनके पास नागरिक के तौर पर अधिकार नहीं हैं। उनके बीच भी गुरुवार को जश्न देखने को मिला


