भारत के रुख का रूस ने किया स्वागत, कही बड़ी बात

नई दिल्ली. रूस ने यूक्रेन के बीच संकट को कोई समाधान निकलता हुआ नहीं दिख रहा है. इस मामले को लेकर अमेरिका और रूस के बीच तनातनी अपने चरम पर है. हालांकि इस मामले के कारण भारत अमेरिका और रूस दोनों के साथ अपने ताल्लुकात को बिगाड़ना नहीं चाहता है, इसलिए इस मामले पर अब तक भारत तटस्थ रुख अपना रहा है. इसी बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मिंस्क समझौते को लेकर भारत द्वारा दिए बयान की रूस ने सराहना की है. रूस ने कहा है कि हम मिंस्क समझौते पर संतुलित, सैद्धांतिक और स्वतंत्र दृष्टिकोण अपनाने के लिए भारत का स्वागत करते हैं. यूक्रेन पर 2014 और 2015 में हुए मिंस्क समझौते पर संयुक्त राष्ट्र में भारत ने कहा, शांत और रचनात्मक कूटनीति प्रयास समय की मांग है और अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा हासिल करने के व्यापक हित में सभी पक्षों द्वारा ऐसा कोई भी कदम उठाए जाने से बचा जाना चाहिए जो तनाव को बढ़ाता है.
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कहा है कि इस मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के लिए कूटनीतिक संवाद ही सबसे बेहतर तरीका है. न्यूयॉर्क में भारत के स्थायी मिशन ने इस बयान को ट्वीट किया है. इस ट्वीट को रीट्वीट करते हुए भारत में रूसी दूतावास ने बयान जारी कर भारत के इस कदम का स्वागत किया है. नई दिल्ली में स्थित रूसी दूतावास ने कहा, हम भारत के संतुलित, सैद्धांतिक और स्वतंत्र रुख का स्वागत करते हैं.
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि भारत मिंस्क समझौतों के तहत क्रियान्वयन पर चल रहे प्रयासों का स्वागत करता है. इस समझौते में जर्मनी, रूस, यूक्रेन और फ्रांस भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि समझौते पूर्वी यूक्रेन में स्थिति से निपटने में मिंस्क समझौता बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान के लिए उपयुक्त आधार प्रदान करता है. भारत ने सभी पक्षों से कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से बातचीत जारी रखने का आह्वान किया और मिंस्क समझौते के क्रियान्वयन पर काम करने की अपील की.
क्या है मिंस्क समझौता
दरअसल, पूर्वी यूक्रेन में रूसी भाषा बोलने वाले लोगों यूक्रेन के खिलाफ वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं. इसी मुद्दे को लेकर यूक्रेन और रूस के बीच बेलारूस की राजधानी मिंस्क में 2014 और 2015 में दो समझौते हुए थे. इन समझौते में फ्रांस और जर्मनी भी शामिल था. इन समझौते के तहत ही अलगाववादी और यूक्रेन सरकार के बीच जारी संघर्ष को खत्म करने का आह्वान किया गया था. इस समझौते के तहत पूर्वी यूक्रेन के विद्रोही और यूक्रेन सरकार के बीच तत्काल युद्ध विराम, हथियारों की वापसी, लड़ाकों के उपर से केस वापसी, डोनेत्स्क और लुहंस्क में अंतरिम सरकार का गठन, बंधकों और कैदियों का आदान-प्रदान जैसे मुद्दे सहित 13 मुद्दों पर आपसी सहमति व्यक्त की गई है. इसमें कहा गया था कि रूस, यूक्रेन और OSCE के प्रतिनिधि मिलकर काम करेंगे. हालांकि इस समझौते पर अब तक अमल नहीं हुआ. अब यूरोप को लगता है कि इन समझौते पर अमल कर रूस और यूक्रेन के बीच तनाव को घटाया जा सकता है.





