कोरोना से जूझ रहे अधिवक्ताओ ने अपने समूह के लिए बेड आरक्षित करने हेतु सीएम केजरीवाल को लिखा पत्र

नई दिल्ली: कोरोना वायरस से लगातार बिगड़ते हालात के बीच देश की राष्ट्रीय राजधानी में वकीलों ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से जजों, वकीलों और कोर्ट स्टाफ के लिए हॉस्पिटल में बेड रिजर्व करने की मांगकी है. उनका कहना है कि उन्हें हॉस्पिटल में बेड ढूंढने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
द्वारका कोर्ट बार एसोसिएशन ने सीएम अरविंद केजरीवाल को लिखे लेटर में कहा कि जजों, कोर्ट स्टाफ और उनके परिवार के लोगों को हॉस्पिटल में एडमिट होने में बहुत सी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं, ऐसे में सरकार उनके लिए बेड रिजर्व करे. कई वकील, जज, कोर्ट स्टाफ और उनके परिवार वाले कोरोना संक्रमित हो चुके हैं. द्वारका सब-सिटी के आसपास कोई सरकारी हॉस्पिटल भी नहीं है और यहां की जनसंख्या 12 लाख से ज्यादा है.
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वाईपी सिंह ने सुझाव देते हुए कहा कि हाल ही बने इंदिरा गांधी गवर्नमेंट हॉस्पिटल में 17 हजार बेड हैं. उसे जनता के लिए खोल दिया जाना चाहिए और कोर्ट स्टाफ के लिए उसमें बेड रिजर्व किए जाने चाहिए.
वाईपी सिंह ने आगे कहा कि वकीलों के लिए कम से कम 500 बेड रिजर्व किए जाने चाहिए. इसके अलावा जजों और उनके परिजनों के लिए 50 और कोर्ट स्टाफ के लिए 100 बेड रिजर्व करने चाहिए. बता दें कि ये लेटर दिल्ली के सीएम के अलावा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को भी भेजा गया है.
लेटर में आगे लिखा है कि दिल्ली के सीएम बार एसोसिएशन की बेड रिजर्व करने की मांग पर जल्द विचार करें क्योंकि कोरोना की सेंकेंड वेव में हालात तेजी से बदतर हो रहे हैं. अकेले दिल्ली में हर दिन कोरोना के 20 हजार से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं.
गौरतलब है कि केजरीवाल सरकार ने पिछले हफ्ते दिल्ली के अशोका होटल के 100 कमरों को कोविड हेल्थ फैसिलिटी के रूप में बदल दिया था और ये सभी कमरे दिल्ली हाई कोर्ट के जजों, न्यायिक अधिकारियों और उनके परिजनों के लिए रिजर्व कर दिए थे. इस पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल सरकार को फटकार लगाई थी. हाई कोर्ट ने कहा था कि उन्होंने दिल्ली सरकार से कभी भी ऐसी कोई मांग नहीं की थी.
