पंजाब में युवा नेता 12 घंटे से भूख हड़ताल पर , नीट पेपर लीक विरोध में सत्याग्रह
रविश शर्मा द्वारा निष्पक्ष जाँच , परीक्षा प्रणाली और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की उठाई मांग
जालंधर। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट ) पेपर लीक मामले और दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में पंजाब के जालंधर में शुक्रवार को न्याय सत्याग्रह आयोजित किया गया। इस दौरान युवा नेता रवीश राज शर्मा ने डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के सामने स्थित पुडा परिसर में 12 घंटे की सांकेतिक भूख हड़ताल शुरू कर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई।
रवीश राज शर्मा ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं(नीट )की निष्पक्षता पर उठ रहे सवाल लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े हैं। उनका कहना था कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय सरकार को उनकी चिंताओं का समाधान संवाद और पारदर्शी कार्रवाई के जरिए करना चाहिए।
निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग
भूख हड़ताल के दौरान उन्होंने NEET पेपर लीक मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। साथ ही उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग उठाई और परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक सुधार की आवश्यकता बताई।
दिल्ली में छात्रों पर कथित कार्रवाई का विरोध
रवीश राज शर्मा ने आरोप लगाया कि दिल्ली में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ बल प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक और विद्यार्थी को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है तथा ऐसे मामलों में संवाद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
‘यह किसी राजनीतिक दल का आंदोलन नहीं’
उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय सत्याग्रह किसी राजनीतिक दल के बैनर तले नहीं, बल्कि सामाजिक मंच के माध्यम से आयोजित किया गया है। उनका कहना था कि आंदोलन का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों के हितों की रक्षा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
उन्होंने समाज के सभी वर्गों से इस अभियान का समर्थन करने की अपील करते हुए कहा कि जब भी युवाओं ने अपने अधिकारों और देश के भविष्य के लिए आवाज उठाई है, तब सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं।
परीक्षा प्रणाली में सुधार की अपील
सत्याग्रह के दौरान उपस्थित लोगों ने भी प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने की मांग दोहराई। उनका कहना था कि छात्रों का विश्वास बनाए रखने के लिए सरकार को परीक्षा प्रणाली में प्रभावी सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।

