main slide

​चिकित्सा क्रांति: रोबोटिक सर्जरी और AI पैथोलॉजी से बदला देश की स्वास्थ्य सेवा का चेहरा ​विजय दीक्षित !

कोलकाता -: ( 17 जून 2026) – : देश के चिकित्सा क्षेत्र में एक अभूतपूर्व तकनीकी बदलाव देखा जा रहा है। पारंपरिक सर्जरी और मैनुअल डायग्नोस्टिक्स की जगह अब हाई-टेक रोबोटिक आर्म्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ले रहे हैं। एम्स (AIIMS) दिल्ली से लेकर कोलकाता के अपोलो ग्लेनेगल्स (Apollo Gleneagles) जैसे बड़े अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी और AI-संचालित पैथोलॉजी की मांग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वैश्विक बाजार की बात करें तो ‘ग्रैंड व्यू रिसर्च’ (Grand View Research) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल रोबोटिक सर्जरी मार्केट साल 2024 के 6.2 अरब डॉलर से 17.6% की वार्षिक दर (CAGR) के साथ बढ़कर साल 2032 तक 22.7 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। भारत भी इस दौड़ में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, जहाँ 2024 तक ही 250 से अधिक उन्नत रोबोटिक सिस्टम स्थापित हो चुके हैं।

​सर्जरी: सूक्ष्म, सटीकता और संरक्षण

​चिकित्सा जगत में ‘दा विंची सर्जिकल सिस्टम’ (Da Vinci Surgical System) दुनिया का सबसे सफल प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है, जो अब तक 70 से अधिक देशों के 8,000 अस्पतालों में 1 करोड़ से अधिक सफल ऑपरेशनों को अंजाम दे चुका है। इसके 360-डिग्री घूमने वाले रोबोटिक हाथ इंसानी हाथों के सूक्ष्म कंपन (tremor) को पूरी तरह समाप्त कर देते हैं। ​विभिन्न जटिल ऑपरेशनों में इसके परिणाम निम्नलिखित रहे हैं।

​मस्तिष्क सर्जरी -: ट्यूमर को 0.15mm से भी कम की त्रुटि के साथ बाहर निकाला जा रहा है, जिससे मरीजों का रिकवरी समय 50% तक कम हो गया है।

​लीवर सर्जरी -: पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में रक्त का रिसाव 35-45% तक कम हुआ है और अस्पताल में रहने की अवधि 7-10 दिनों से घटकर मात्र 4 दिन रह गई है।

​किडनी सर्जरी -: वॉर्म इस्किमिया टाइम (Warm Ischemia Time) घटकर केवल 15-18微 मिनट रह गया है, जिससे किडनी की कार्यक्षमता संरक्षण दर 85-90% तक पहुंच गई है।

अंग ट्रांसप्लांट -: पोस्ट-ऑपरेटिव इन्फेक्शन की दर पारंपरिक 5.8% से घटकर मात्र 2.1% रह गई है।

लागत में बड़ी कमी -: भारत के लिए सबसे बड़ी राहत आईआईटी (IIT) दिल्ली द्वारा विकसित ‘SSi Mantra’ के रूप में आई है। यह भारत का पहला स्वदेशी रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम है, जो विदेशी ‘दा विंची’ सिस्टम की तुलना में करीब 60% सस्ता है, जिससे आम भारतीय मरीजों के लिए रोबोटिक सर्जरी का खर्च काफी कम होने की उम्मीद है।

मिनटों में कैंसर की पहचान -: विशेषज्ञों के अनुसार, रोबोटिक पैथोलॉजी चिकित्सा के क्षेत्र में सबसे शक्तिशाली आयाम बनकर सामने आ रही है। जहाँ एक पारंपरिक पैथोलॉजिस्ट एक घंटे में केवल 20 स्लाइड्स की जांच कर पाता है, वहीं AI-संचालित रोबोटिक सिस्टम उसी एक घंटे में 500 से अधिक स्लाइड्स का सटीक विश्लेषण कर सकते हैं। ​इस क्षेत्र में हो रहे बड़े तकनीकी बदलाव इस प्रकार हो चुके हैं।

​डिजिटल पैथोलॉजी और AI स्कैनिंग – : अमेरिकी कंपनी ‘Paige.AI’ (जिसे 2021 में FDA से पहली बार क्लिनिकल उपयोग की मंजूरी मिली थी) और ‘PathAI’ जैसे सिस्टम 15,000 से अधिक पैथोलॉजिस्टों के लाखों केस डेटा पर प्रशिक्षित हैं। ये 98% से अधिक सटीकता के साथ कैंसर कोशिकाओं की पहचान करते हैं, जिससे झूठी नकारात्मक (False Negative) रिपोर्ट की दर 30-40% तक कम हो गई है।

ऑटोमेटेड लैबोरेटरी टेस्टिंग -: ‘Roche cobas’ और ‘Siemens ADVIA’ जैसे रोबोटिक एनालाइजर्स प्रति घंटे 2,000 से अधिक ब्लड, यूरिन और tissue samples को प्रोसेस कर सकते हैं। बारकोड और RFID ट्रैकिंग की वजह से सैंपल्स के आपस में मिक्स होने का खतरा खत्म हो गया है और मानवीय त्रुटि की दर 6.5% से घटकर लगभग शून्य (0.03%) पर आ गई है।

​लिक्विड बायोप्सी -:  Guardant360′ और ‘Foundation Medicine’ जैसी रोबोटिक तकनीकों की मदद से अब बिना किसी दर्दनाक चीर-फाड़ या टिश्यू काटे, केवल खून के सैंपल से स्टेज-1 कैंसर का 85% से अधिक सटीकता से पता लगाया जा रहा है। भारत के ग्रामीण इलाकों के लिए यह तकनीक जीवनरक्षक साबित हो रही है।

​ऑटोमेटेड हिस्टोपैथोलॉजी -: टिश्यू को काटने, रंगने (staining) और माउंट करने का काम अब पूरी तरह स्वचालित हो गया है। ‘Sakura Tissue-Tek Prisma’ जैसी मशीनें एक घंटे में 350 स्लाइड्स 99.9% एकरूपता के साथ तैयार कर रही हैं। वहीं ‘Leica Bond-III’ और ‘Thermo Fisher Autostainer’ कैंसर बायोमार्कर टेस्टिंग में बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप (Zero Human Intervention) के काम कर रहे हैं।

​AI-संचालित साइटोलॉजी -: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भारत में हर साल सर्वाइकल कैंसर से 77,000 महिलाओं की मौत होती है। ‘Hologic ThinPrep Imaging System’ जैसे AI टूल्स पैप स्मीयर स्लाइड्स की ऑटोमेटेड स्क्रीनिंग करके इस मृत्यु दर को 60% तक रोकने में सक्षम हैं।

​स्वास्थ्य सेवा के अन्य क्षेत्रों में रोबोटिक्स का विस्तार  ​रोबोटिक नर्सिंग -: अस्पतालों के वार्डों में अब ‘Moxi Robot’ जैसी तकनीकें दवाएं और लैब सैंपल पहुंचाने का काम संभाल रही हैं। इसके अलावा ‘Xenex LightStrike’ तकनीक यूवी (UV) प्रकाश की मदद से मात्र 2 मिनट में कमरों को 99.99% तक कीटाणु-मुक्त (Sanitize) कर देती है। बुजुर्ग और गंभीर मरीजों को सुरक्षित ढंग से उठाने और स्थानांतरित करने के लिए ‘ROBEAR’ रोबोट का इस्तेमाल किया जा रहा है।

रोबोटिक डायलिसिस -: किडनी के मरीजों के लिए ‘Wearable Artificial Kidney (WAK)’ जैसी पहनने योग्य रोबोटिक डिवाइसेस आ चुकी हैं, जो चौबीसों घंटे (24/7) डायलिसिस की सुविधा देती हैं। यह तकनीक रियल-टाइम ब्लड मॉनिटरिंग और एडैप्टिव फ्लो कंट्रोल के जरिए घर पर ही रात के समय स्वचालित पेरिटोनियल डायलिसिस (Peritoneal Dialysis) को सुरक्षित बनाती है।

Show More

यह भी जरुर पढ़ें !

Back to top button