तिरंगा तीन रंगों से बढ़कर भारत माता का जीवंत स्वरूप है : सपना गोयल !
26 जनवरी 2026 को भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। यह दिन हमारे संविधान की शक्ति और एक राष्ट्र के रूप में हमारी एकता का उत्सव है। इसी दिन हमारा संविधान लागू हुआ था, जिसने हमें एक सूत्र में पिरोया। किसी भी भारतीय राष्ट्रीय पर्व का केन्द्रीय आकर्षण होता है हमारा प्यारा तिरंगा। अक्सर हम सीमित दृष्टिकोण के कारण भारतीय झंडे में केवल तीन रंग केसरिया, सफेद और हरा ही देख पाते हैं जबकि भारतीय झंडे का बिम्ब इससे भी कहीं अधिक विशाल है। एक सच्चे भारतीय के लिए तिरंगा रंगों का संयोजन मात्र नहीं, बल्कि साक्षात भारत माता का स्वरूप है। साल 1905 में, प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार अवनीन्द्रनाथ टैगोर ने ‘भारत माता’ का पहला प्रतिष्ठित चित्र बनाया था। उसमें आराध्य देवी ‘भारत माता’ को भगवा वस्त्र पहने एक साध्वी जैसी महिला के स्वरूप में दर्शाया गया है, जिनके चारों हाथों में एक किताब, धान की बालियां, सफेद कपड़े का एक टुकड़ा और एक माला है। वर्तमान में यह पेन्टिंग कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल हॉल के संग्रह में स्थित है।
यह छवि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा अपने आनंदमठ में वर्णित राष्ट्र के मानवीकरण पर आधारित है। यह पेन्टिंग इस अवधारणा का पहला सचित्र चित्रण था और इसे व्यापक भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान स्वदेश के आदर्शों के साथ चित्रित किया गया था। आज भी भारत माता सभी देशवासियों की चेतना स्वरूपी मां के रूप में पूजनीय है। इसके साथ ही भारत मां एक ही संदेश देती है अपने वतन पर गर्व करो और स्वदेशी की भावना से हर कार्य करो तभी देवभूमि भारत भी सशक्त होगा। ऋषियों और संतों द्वारा पूजित यह धरा पुन: विश्व गुरु के रूप में स्थापित हो सकेगी। आइए हम सभी संकल्प ले कि तिरंगे को भारत माता का जीवंत स्वरूप मान कर उसकी आन, बान और शान के लिए अपना सर्वस्व समर्पण कर देंगे। तभी युगों युगों तक हमारी भारत भूमि अखंड रहेगी और देश सुरक्षित।

