रील स्क्रॉलिंग बन रही नई डिजिटल लत, याददाश्त और फोकस पर पड़ रहा गंभीर असर
विशेषज्ञों की चेतावनी — लगातार रील देखने की आदत बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक
Tech News: आज के डिजिटल दौर में मोबाइल पर घंटों रील्स देखना बच्चों और युवाओं की सबसे बड़ी आदत बनता जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार रील स्क्रॉलिंग दिमाग पर उसी तरह असर डालती है, जैसे शरीर पर जंक फूड का असर पड़ता है। इससे न केवल याददाश्त कमजोर होती है, बल्कि ध्यान केंद्रित करने की क्षमता भी प्रभावित होती है।
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी की एक स्टडी में सामने आया है कि लगातार छोटे और तेजी से बदलते वीडियो देखने की आदत दिमाग की फोकस क्षमता को कमजोर कर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या सिर्फ स्क्रीन टाइम की नहीं, बल्कि उस कंटेंट की है जिसे लोग लगातार देख रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार रैंडम रील्स देखना दिमाग को तुरंत मनोरंजन का आदी बना देता है। इसका असर पढ़ाई, काम और रिश्तों पर भी दिखाई देने लगता है। कई लोग धीरे-धीरे दोस्तों और परिवार से दूरी बनाने लगते हैं और वास्तविक दुनिया से ज्यादा समय मोबाइल स्क्रीन पर बिताने लगते हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के विशेषज्ञ जेसन नागाटा के अनुसार फोन का सामान्य उपयोग और फोन की लत दो अलग चीजें हैं। यदि कोई व्यक्ति लगातार सोशल मीडिया पर समय बिताने लगे, पढ़ाई या काम प्रभावित होने लगे और बिना फोन के बेचैनी महसूस करे, तो यह डिजिटल एडिक्शन का संकेत हो सकता है।
विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि जिन माता-पिता का स्क्रीन टाइम ज्यादा होता है, उनके बच्चों में भी मोबाइल की लत लगने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए परिवार में डिजिटल अनुशासन बेहद जरूरी है।
डिजिटल लत कम करने के लिए विशेषज्ञ “फैमिली मीडिया प्लान” अपनाने की सलाह दे रहे हैं। इसके तहत खाने के समय, सोने से पहले और परिवार के साथ बैठने के दौरान फोन इस्तेमाल न करने जैसे नियम बनाए जा सकते हैं। साथ ही मोबाइल फोन को बेडरूम और डाइनिंग टेबल से दूर रखने की सलाह दी गई है।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते स्क्रीन आदतों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले समय में बच्चों और युवाओं की एकाग्रता, सामाजिक व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।

