150–250 रुपये किलो बिक रहा खापली गेहूं, पोषण से भरपूर ‘हेरिटेज ग्रेन’ की बढ़ी मांग
कम ग्लूटेन और लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला खापली गेहूं मधुमेह मरीजों के लिए फायदेमंद, जैविक खेती से किसान को मिल रहा बेहतर मुनाफा
Kishan jagat:बिहार के जमुई जिले में एक किसान ने पारंपरिक खेती से हटकर ऐसा गेहूं (खापली गेहूं)उगाया है, जिसकी कीमत बाजार में 150 से 250 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इस खास किस्म का नाम खापली गेहूं है, जिसे दुनिया के सबसे पुराने और पौष्टिक अनाजों में गिना जाता है।
किसान निरंजन कुमार ने इस गेहूं की जैविक खेती कर एक नई मिसाल पेश की है। उन्होंने बताया कि खापली गेहूं में ग्लूटेन की मात्रा कम होती है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी कम होता है। यही कारण है कि यह धीरे-धीरे पचता है और ब्लड शुगर को अचानक बढ़ने से रोकने में मदद करता है, जिससे यह मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी माना जाता है।
इस गेहूं की एक और खासियत इसका उच्च फाइबर और पोषक तत्वों से भरपूर होना है। इसमें मैग्नीशियम, आयरन, विटामिन बी, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं। इसी वजह से इसे ‘हेरिटेज ग्रेन’ के रूप में भी जाना जाता है।
निरंजन कुमार ने बताया कि उन्होंने पारंपरिक खेती के साथ-साथ विलुप्त हो रही गेहूं की किस्मों को संरक्षित करने का भी काम शुरू किया है। वह जैविक खाद का उपयोग करते हैं और अपने खेत में दो दर्जन से अधिक पारंपरिक बीजों का संरक्षण कर रहे हैं।
जानकारों के अनुसार, खापली गेहूं की खेती पहले महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात के कुछ हिस्सों में होती थी, लेकिन अब इसकी बढ़ती मांग के चलते अन्य राज्यों में भी किसान इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं।

