राज्य
इस ब्रह्मांड में हमारे द्वारा बोला गया एक-एक शब्द हमेशा विद्यमान रहता है। योगी रुपेश ज़ी !
यहां कभी कुछ नष्ट नहीं होता इसलिए *जो लोग व्यर्थ की बक-बक, दूसरों की बुराई, अपशब्दों के प्रयोग करते रहतें हैं, वह प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष अपना नुकसान तो कर ही रहें हैं साथ-साथ इस ब्रह्मांडीय तरंगों को प्रदूषित भी कर रहें हैं। हमें सदा सतर्क रहना चाहिए क्योंकि इस तरह की दुविधात्मक/नकारात्मक/आलोचनात् मक तरंगों से हमारा जीवन नर्क बनने लगता है, जिसकी जाने-अनजाने हमें बहुत बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ती है। दुनिया में सबसे ज़्यादा दुख व्यक्ति अपने बुरे वचनों/विचारों/कृत्यों के कारण भोगता है।
वास्तव में हमारे जीवन में आने वाली तरंगें, हमारे साथ साथ, हमारे चारों तरफ के वातावरण और हमारे आसपास के संबंधों/संबंधियों के जीवन को भी प्रभावित करतीं हैं। ध्यान रहे कि हमारे मुख/मन से आज के बाद जो भी शब्द निकलता/बनता हो, वह हमेशा मौजूद रहने वाला है और वह हमारे और हमारी आने वाली कई पीढ़ियों का भविष्य निर्धारित करता है। इसलिए हमारे मनीषियों ने कहा है कि हमें अपनी सभी तरंगों/विचारों पर ध्यान रखते हुए मनसा-वाचा-कर्मणा जीवनयापन करना ही श्रेयस्कर है। होश रहे कि जब हम इस प्रकृति का ध्यान रखेंगे, मधुर/पवित्र वाणी/भाव का प्रयोग करेंगे तो निश्चित रूप से यह प्रकृति भी हमारा सकारात्मक ध्यान रखेगी।

