बच्चों को बार-बार सिरदर्द हो तो न करें नजरअंदाज, इन लक्षणों पर तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से लें सलाह !
रुद्रपुर -: बच्चों में सिरदर्द होना आम बात है। कई बार कम नींद, पानी की कमी, समय पर खाना न खाना, ज्यादा स्क्रीन देखने या तनाव के कारण सिरदर्द हो सकता है। ऐसे मामलों में आराम और दिनचर्या में सुधार से समस्या ठीक हो जाती है। लेकिन अगर बच्चे को लगातार या बार-बार सिरदर्द हो रहा है और इससे उसकी पढ़ाई, खेलकूद या रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के न्यूरो सर्जरी विभाग के डायरेक्टर एवं यूनिट हेड डॉ. कपिल जैन ने बताया, ज्यादातर बच्चों में सिरदर्द किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता।
हालांकि, कुछ मामलों में बार-बार होने वाला सिरदर्द न्यूरोलॉजिकल समस्या का शुरुआती संकेत हो सकता है। इसलिए सिरदर्द के पैटर्न और उससे जुड़े लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है। अगर सिरदर्द कई हफ्तों या महीनों से हो रहा है, धीरे-धीरे बढ़ रहा है या इतना तेज है कि बच्चा स्कूल या खेलकूद छोड़ने लगे, तो न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए। ऐसा सिरदर्द जो बच्चे की नींद खोल दे या सुबह उठने के समय ज्यादा हो, उसे भी गंभीरता से लेना चाहिए।
डॉ. कपिल ने आगे बताया तेज सिरदर्द के साथ बार-बार उल्टी, दौरे, हाथ-पैर में कमजोरी, चलने में परेशानी, नजर में बदलाव, व्यवहार में अचानक बदलाव, अत्यधिक नींद या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। बच्चों में माइग्रेन भी बार-बार सिरदर्द की एक आम वजह हो सकती है। इसमें सिरदर्द के साथ जी मिचलाना, उल्टी और तेज रोशनी या आवाज से परेशानी हो सकती है। सही इलाज से बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं।
बच्चे के सिरदर्द की अवधि, बार-बार होने की वजह, समय और अन्य लक्षणों की जानकारी लेकर न्यूरोलॉजिकल जांच करते हैं। हर बच्चे को एमआरआई या सीटी स्कैन की जरूरत नहीं होती। जरूरत पड़ने पर ही ब्रेन इमेजिंग की सलाह दी जाती है। माता-पिता बच्चों की नींद पूरी कराने, पर्याप्त पानी पिलाने, समय पर पौष्टिक भोजन देने, स्क्रीन टाइम सीमित करने और नियमित शारीरिक गतिविधि के जरिए सिरदर्द का खतरा कम कर सकते हैं। बार-बार या असामान्य सिरदर्द होने पर समय पर डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।


