सभी की मै मंगल कामना में ही तुम्हारा सुख छिपा है !
जो फरियाद करते हैं, नकारात्मक सोचते हैं, दूसरों पर दोषारोपण करते हैं, वे अपने लिए ही खाई खोदने का काम करते हैं। तुम ईमानदारी से सभी का मंगल चाहो, सभी का हित चाहो और फिर अपना। समाज का मंगल चाहना – यह संसार की सेवा हो गयी। ईश्वर को प्रेम करना – यह ईश्वर की सेवा हो गयी, और अपने आत्मा में आकर बैठना, अपनी सेवा हो गयी। बस, तीन सेवाएँ करनी हैं और क्या है !? जीवन में शिकायतें और नकारात्मक चिंतन होगा, तो जीवन की शक्तियाँ उसीमें क्षीण हो जाएँगी तथा लक्ष्य तक पहुँचना कठिन हो जायेगा। जिसका हृदय धैर्यऔर सही विचार से सराबोर रहता है, वह छोटी-मोटी बातों से दुःखी नहीं होता। बड़े-बड़े उतार-चढ़ावों में भी वह उतना प्रभावित नहीं होता, जितने निगुरे लोग होते हैं। अगर वह निष्फल भी हो जाए तो हताश-निराश नहीं होता बल्कि विफलता को खोजकर फेंक देता है और फिर तत्परता से ऊँचे उद्देश्य की पूर्ति में लग जाता है। -शिवाकांत पाठक

