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दुश्वारियों से मिला हौसला: डेफ ओलंपियन अर्चना की अब गोल्ड पर नज़र, सरकार से नौकरी की मांग

टेबल टेनिस प्लेयर अर्चना पांडेय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से खेल कोटे से नौकरी देने की अपील की है.

टेबल टेनिस प्लेयर अर्चना पांडेय.

टेबल टेनिस प्लेयर अर्चना पांडेय

लखनऊ: कहते हैं हौसला हो तो कोई भी कमी रास्ता नहीं रोक सकती| लखनऊ की अर्चना पांडेय ने इस बात को सच कर दिखाया है | बचपन से ही कम सुनाई देने के बावजूद उन्होंने टेबल टेनिस को अपना हथियार बनाया |’डेफ ओलंपिक’ तक भारत का झंडा बुलंद कर रही हैं |

34 साल की अर्चना पांडेय अब तक तीन बार ओलंपिक में खेल चुकी हैं | अब अगले ओलंपिक में गोल्ड मेडल का सपना लेकर उतरेंगी. साथ ही वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सरकारी नौकरी की भी मांग कर रही हैं, ताकि खेल पर पूरा फोकस कर सकें |

संघर्ष से ओलंपिक तक का सफर: अर्चना पांडेय का जन्म 21 अगस्त 1991 को लखनऊ के आलमबाग स्थित प्रेम नगर में हुआ | मध्यम वर्गीय परिवार में पली-बढ़ी अर्चना को बचपन से ही सुनने में दिक्कत थी |

उन्होंने इसे कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया | कोच पराग अग्रवाल के मार्गदर्शन में स्टैग पैसिफिक टेबल टेनिस सेंटर में ट्रेनिंग शुरू की और देखते ही देखते राज्य से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपना लोहा मनवाया |

अंतरराष्ट्रीय मैदान पर भारत का परचम: अर्चना तीन बार डेफ ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं | 2022 में ब्राजील, 2025 में तुर्की और इससे पहले टोक्यो, जापान में हुए डेफ ओलंपिक में उन्होंने देश के लिए खेला है |

दुनिया के सबसे बड़े मंच पर जब अर्चना रैकेट थामती हैं, तो उनकी कमी कहीं नजर नहीं आती | उनका अगला लक्ष्य डेफ ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर तिरंगा सबसे ऊपर फहराना है |

नेशनल और स्टेट लेवल पर धमाल: अर्चना का रिकॉर्ड शानदार रहा है | 2016 में हैदराबाद नेशनल चैंपियनशिप में डबल्स का गोल्ड, सिंगल्स और टीम इवेंट में ब्रांज मेडल जीता |2017 में रांची में डबल्स और टीम में सिल्वर, 2019 में चेन्नई में डबल्स सिल्वर और टीम ब्रांज अपने नाम किया |

हाल ही में 2025 में अहमदाबाद में महिला टीम और डबल्स में सिल्वर और ब्रांज मेडल जीते | यूपी में तो अर्चना का कोई तोड़ नहीं है | उत्तर प्रदेश डेफ गेम्स और राज्य चैंपियनशिप में 2015, 2017, 2021, 2022 और 2025 में सिंगल्स, डबल्स और मिक्स्ड डबल्स में लगभग हर बार गोल्ड मेडल जीता है | लखनऊ से निकलकर उन्होंने साबित किया कि टैलेंट किसी पहचान का मोहताज नहीं होता |

पढ़ाई के साथ खेल में भी अव्वल: अर्चना ने खेल के साथ पढ़ाई भी जारी रखी. 2006 में हाईस्कूल, 2008 में इंटर और 2011 में लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक किया | आज वह खुद नई पीढ़ी को तैयार कर रही हैं. वह युवा टेबल टेनिस खिलाड़ियों को कोचिंग देकर उन्हें नेशनल लेवल के लिए तैयार कर रही हैं |

सरकार से एक स्थाई नौकरी की मांग: इतनी बड़ी उपलब्धियों के बाद भी अर्चना को नौकरी की प्रबल आवश्यकता है | वह कहती हैं कि ट्रेनिंग, डाइट और विदेश में खेलने का खर्च बहुत होता है | एक स्थाई सरकारी नौकरी मिल जाए तो मैं बिना चिंता के सिर्फ देश के लिए खेलूं और गोल्ड ला सकूं | उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से खेल कोटे से नौकरी देने की अपील की है |

युवाओं के लिए प्रेरणा: अर्चना के कोच पराग अग्रवाल बताते हैं कि अर्चना की कहानी सिर्फ लखनऊ या यूपी के लिए नहीं, पूरे देश के खिलाड़ियों के लिए मिसाल है |  वह कहती है कि सुनने की दिक्कत है तो क्या हुआ? मेहनत और सही कोच मिले तो कोई भी मंजिल दूर नहीं |

उनकी कामयाबी ने दिखा दिया कि अगर जज्बा हो तो शारीरिक कमी भी जीत के रास्ते में नहीं आती | आज अर्चना पांडे का नाम लखनऊ के गौरव से जुड़ गया है | अब सबकी नजर उनके अगले ओलंपिक पर है, जहां वो गोल्ड मेडल के साथ लौटना चाहती हैं |

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