उत्तर प्रदेशराज्य

अपराध के विरुद्ध लड़ाई में नि:शुल्क सहायता करती है अदालत

कई मामलों में यदि वे पात्र हैं तो ‘मुफ़्त विधिक सहायता' का भी एक बेहतरीन विकल्प

लोग मानते हैं कि कानूनी कार्यवाही करना यानी जेब में छेद हो जाना। इसलिए महिलाएं या फिर आर्थिक रूप से कमज़ोर लोग अपराध के विरोध में विधिक कार्यवाही ही नहीं करते। पर क्या आप जानते हैं कि अदालत अपराध के विरुद्ध इस लड़ाई में आपको नि:शुल्क सहायता भी मुहैया कराती है?

हमारे देश में आज भी बहुत से लोग मानते हैं कि कानूनी प्रक्रिया में हिस्सा लेने पर उन्हें ख़ूब सारे पैसे लगाने होंगे। लेकिन ऐसा नहीं है। संविधान के अनुसार कई मामलों में यदि वे पात्र हैं तो ‘मुफ़्त विधिक सहायता’ का भी एक बेहतरीन विकल्प मिल सकता है, जिससे आर्थिक बोझ को पाटते हुए पूरी मज़बूती के साथ कानूनी लड़ाई लड़ सकते हैं। इसका लाभ आप कब ले सकते हैं, प्रक्रिया क्या है, साथ ही कौन-सा कानून इसे सुरक्षित रखता है, जानिए।

किन्हें मिलती है मुफ़्त सहायता

हर व्यक्ति को मुफ़्त वकील नहीं मिलता, इसके लिए कुछ श्रेणियां निर्धारित हैं। जैसे- महिलाएं और बच्चे। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के सदस्य। औद्योगिक श्रमिक। सामूहिक आपदा, हिंसा, बाढ़, या भूकंप के शिकार लोग। विकलांग व्यक्ति या फिर हिरासत में मौजूद लोगों को भी ये सहायता मिल जाती है। साथ ही वे लोग जिनकी वार्षिक आय एक निश्चित सीमा से कम है (विभिन्न राज्यों में यह ₹1 लाख से ₹3 लाख के बीच हो सकती है हालांकि सुप्रीम कोर्ट के लिए वार्षिक आय की सीमा 5 लाख रुपये से कम है।) को भी सहायता मिलती है।

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