अंतराष्ट्रीय

चंद्रयान-3 (चंद्रयान-3)या लूना-25 में से चांद पर पहले कौन पहुंचेगा?

चंद्रयान-3: भारत और रूस के बीच इस समय अंतरिक्ष में होड़ मची हुई है. दरअसल, दोनों देश के चंद्र अभियान अगले सप्‍ताह चांद के दक्षिणी हिससे पर सॉफ्ट लैंडिंग करने की तैयारी में है. पूरी दुनिया की निगाहें इसी बात पर टिकी हैं कि दोनों देशों में से किसका अभियान पहले लैंड करेगा. दरअसल, भारत ने अपने तीसरे चंद्र अभियान चंद्रयान-3  (चंद्रयान-3) को 14 जुलाई 2023 को लॉन्‍च किया था. इसने 5 अगस्‍त को चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कर लिया था.

भारत के चंद्रयान-3 को प्रक्षेपण के 40 दिन के भीतर लैंड कराने की योजना पर काम चल रहा है. इसके लिए चंद्रयान-3 सावधानीपूर्वक अपनी कक्षा में खुद को एडजस्‍ट कर रहा है. उम्‍मीद है कि ये 23 या 24 अगस्‍त को चांद पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग करेगा. वहीं, रूस ने 50 साल बाद लूनर मिशन के तहत लूना-25 को 10 अगस्‍त को अंतरिक्ष में भेजकर चंद्र अन्‍वेषण में शानदार वापसी की है. संभावना जताई जा रही है कि ये महज 11 दिन में 21 अगस्‍त 2023 तक चांद पर लैंड करने में सफल हो जाएगा. बता दें कि पिछली बार सोवियत युग में रूस ने 1976 में लूना-24 मिशन को भेजा था.

चंद्रयान-3 का भार लूना-25 से है ज्‍यादा
भारत और रूस के बीच चांद पर पहले लैंडिंग को लेकर मची होड़ ने अंतरिक्ष समाचारों पर नजर रखने वाले पूरी दुनिया के लोगों में कौतुहल पैदा कर दिया है. दोनों देशों में किसी एक के मिशन मून के चांद के अनजान व रहस्‍यों से भरे हुए दक्षिणी हिस्‍से में लैंड करने से पहले दोनों मिशन की तकनीक, बजट, पथ और मकसद के बारे में समझते हैं. लूना-25 का भार 1,750 किग्रा है. वहीं, चंद्रयान-3 का भार 3,800 किग्रा है. लूना-25 का अधिशेष ईंधन भंडारण ईंधन दक्षता से जुड़ी चिंताओं को दूर करता है. जिससे यह अधिक सीधा मार्ग अपनाने में सक्षम होता है. इसके उलट चंद्रयान-3 की ईंधन वहन क्षमता के अवरोध के कारण चंद्रमा तक पहुंचने के लिए ज्यादा घुमावदार रास्‍ते की जरूरत है.

चंद्रयान-3 का भार 3,800 किग्रा है. साथ ही इसे चांद तक पहुंचने के लिए ज्‍यादा घुमावदार रास्‍ते की जरूरत है.

कहीं लूना-25 से टकरा ना जाए चंद्रयान-3
चंद्रयान-3 फिलहाल चंद्रमा की कक्षा में घूम रहा है. इससे साफ है कि चंद्रयान-3 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने के करीब है. इसके लिए जरूरी है कि चंद्रयान-3 रूस के लूनर मिशन लूना-25 से ना टकराए. वैश्विक स्तर पर ये खबर सुर्खियों में है कि रूस का लूना-25 भारत से पहले दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने की राह पर है. इसके साथ ही यह खबर भी लगातार सुर्खियों बटोर रही है कि दोनों मिशन की टक्कर हो सकती है. दरअसल, दोनों का चंद्रमा की सतह तक पहुंचने का रास्ता करीब-करीब एक ही है.

लूना 25 और चंद्रयान 3 के बजट में अंतर
भारत और रूस के चंद्र अभियानों का बजट काफी अलग है. चंद्रयान-3 का बजट 615 करोड़ रुपये है. वहीं, रूस ने अब तक लूना-25 के बजट का अधिकारिक ऐलान नहीं किया है, लेकिन एक अनुमान के मुताबिक रूस इस इस लूनर मिशन पर 200 मिलियन डॉलर के बराबर रकम खर्च कर रहा है. यह निवेश यान के विशिष्‍ट डिजाइन, सुविधाओं और फंक्‍शनेलिटी पर किया गया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि लूना-25 काफी तेज है साथ ही उम्‍मीद जताई जा रही है कि चंद्रयान-3 से पहले चंद्रमा की सतह पर पहुंचेगा.

लूना 25 और चंद्रयान 3 के पथ में अंतर
रूस का मिशन करीब 50 साल बाद शुरू हुआ है. रूस ने अपने लूनर मिशन को लेकर कोई शोर-शराबा नहीं किया. अचानक रूस के इस मिशन से जुड़ी खबरें आना इसरो के लिए खुश करने वाली और प्रतिस्पर्धी हैं. दोनों मिशन का लैंडिंग समय करीब-करीब एक ही है. रूस के लूना-25 ने 11 अगस्‍त को वोस्तोचन कोस्मोड्रोम स्पेसपोर्ट से चंद्रमा के लिए उड़ान भरी थी. फिलहाल ये पृथ्वी की सतह पर घूम रहा है, लेकिन जल्द ही चंद्रमा के पथ से होकर गुजरेगा. तकनीक, भार और ईंधन दक्षता के कारण ये ज्‍यादा सीधा पथ अपनाने में सक्षम है. वहीं, चंद्रयान-3 को ज्‍यादा घुमावदार रास्‍ता अपनाना पड़ रहा है.

चंद्रयान-3 से क्‍या हासिल होने की आस
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. सिवन के मुताबिक, दोनों देशों के मिशन का लक्ष्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचना है. इससे मिशन के नतीजों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि कौन पहले लैंड करता है. इसके उलट ये नई सीमाओं की खोज के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता को मजबूत करता है. उन्‍होंने कहा कि पूरी दुनिया की नजर दोनों देशों के चंद्र अभियानों पर है.दोनों मिशन से चंद्रमा की संरचना, इतिहास और संसाधन के रूप में क्षमता को लेकर नई जानकारियां मिलने की उम्मीद है. मिशन के नतीजों से चंद्रमा के पर्यावरण के बारे में हमारी समझ बढ़ेगी. साथ ही ये भविष्य के चंद्र अभियानों की कोशिशों के लिए राह भी आसान करेगा.

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