चाबहार बंदरगाह (चाबहार बंदरगाह )पर सहयोग जारी रखेंगे दोनों देशों ने जताई आपसी सहमति
नई दिल्ली: ईरान के विदेश मंत्री हुसैन आमिर अब्दुल्लाहियन बुधवार को भारत दौरे पर पहुंचे. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष के अफगानिस्तान, यूक्रेन एवं अन्य क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की. इसके साथ ही उन्होंने करोबार, स्वास्थ्य, लोगों के बीच सम्पर्क सहित द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की. दोनों देशों ने मध्य एशिया समेत इस क्षेत्र के लिए एक ट्रांजिट हब के रूप में चाबहार बंदरगाह (चाबहार बंदरगाह ) के विकास के लिए आपसी सहयोग को जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है. बताया जा रहा है कि प्रमुख बंदरगाह के परिचालन को लेकर चर्चा के लिए दोनों ही देशों के प्रतिनिधि जल्द ही मिलेंगे.
भारत के लिए चाबहार बंदरगाह कई मायनों से महत्वपूर्ण है. चाबहार बंदरगाह से घिरे अफगानिस्तान तक समुद्री मार्ग के उद्देश्य से एक बेहद महत्वपूर्ण परियोजना है. समुद्री मार्ग से वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने के लिए यह बेहद किफायती और सबसे स्थिर मार्ग माना जाता है.
संयुक्त व्यापक कार्य योजना की दी जानकारी
ईरान के विदेश मंत्री का पद संभालने के बाद हुसैन आमिर अब्दुल्लाहियन पहली बार भारत के यात्रा पर हैं इस दौरान उन्होंने बुधवार को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से बातचीत की. अपनी यात्रा के दौरान, ईरानी विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी चर्चा की. चर्चा के दौरान ईरानी विदेश मंत्री ने संयुक्त व्यापक कार्य योजना से संबंधित मौजूदा स्थिति के बारे में विदेश मंत्री को जानकारी दी.
दोनों ही देशों के मंत्रियों ने यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध को लेकर भी चर्चा की. बैठक के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने ट्वीट किया, ‘‘ ईरान के विदेश मंत्री आमिर अब्दुल्लाहियन के साथ विविध विषयों पर व्यापक चर्चा हुई. हमने करोबार, सम्पर्क, स्वास्थ्य, लोगों के बीच सम्पर्क सहित द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की.’’
विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘ अफगानिस्तान, यूक्रेन, संयुक्त व्यापक कार्य योजना (जेसीपीओए) सहित क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान प्रदान किया. ’’ विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब्दुल्लाहियन नयी दिल्ली में बैठकों के बाद मुंबई और हैदराबाद की भी यात्रा करेंगे.
मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि ईरान के विदेश मंत्री की भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों एवं गठजोड़ को और मजबूत बनाया जा सकेगा. अब्दुल्लाहियन की भारत यात्रा ऐसे समय हुई है जब पैगम्बर मोहम्मद के खिलाफ भाजपा के दो पूर्व नेताओं के विवादित बयान को लेकर कुवैत, कतर के साथ ईरान ने भारतीय राजदूत को तलब कर विरोध दर्ज कराया था.





