अंतराष्ट्रीय

असम सरकार (Assam government)का अवैध घुसपैठ के खिलाफ सख्त रुख

गुवाहाटी. असम सरकार (Assam government) अवैध रूप से घुसपैठ कर रहे रहे विदेशियों को लेकर लगातार सख्त रुख अपना रही है. इसको लेकर सोमवार को विधानसभा में आंकड़ा पेश करते हुए सरकार ने पक्ष रखा है. इसमें कहा गया है कि असम समझौते के आधार पर अब तक 30 हजार से अधिक अवैध विदेशियों को राज्य से निर्वासित किया जा चुका है.

असम समझौता कार्यान्वयन मंत्री अतुल बोरा ने विधानसभा में दी गई जानकारी के साथ कहा कि समझौते के प्रावधानों के अनुसार इस साल 31 अगस्त तक अवैध विदेशियों का पता चला है. सरकार इसको लेकर गंभीर है. इन 1,48,022 अवैध विदेशियों में से 31,953 घुसपैठिए थे, जो 1971 से पहले देश में प्रवेश कर चुके थे. उन्होंने कहा कि इनमें 1,16,069 लोग 1971 के बाद आए थे.

30,067 अवैध प्रवासियों को किया गया निर्वासित
बोरा ने यह भी कहा कि समझौते के आधार पर इस साल 31 अगस्त तक 30,067 अवैध प्रवासियों को निर्वासित किया गया है. 15 अगस्त 1985 को हस्ताक्षरित असम समझौते के अनुसार 25 मार्च 1971 को या उसके बाद राज्य में प्रवेश करने वाले किसी भी व्यक्ति को विदेशी माना जाएगा और उसे राज्य से निर्वासित कर दिया जाएगा.

बांग्लादेश से सटी सीमा पर लगाया गया बाड़
मंत्री ने यह भी कहा कि कछार जिले में बांग्लादेश से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने का काम पूरा कर लिया गया है. इसके साथ ही अब सीमा के भीतर घुसपैठ को पूरी तरह से रोका जाएगा. इसके लिए सरकार के स्तर पर खास तौर पर इंतजाम किए जा रहे हैं. गौरतलब है कि अवैध घुसपैठ को लेकर अमित शाह ने पूरी तरह सख्ती दिखाई है और इसी के बाद असम की भाजपा सरकार ने इस पर एक्शन लेना शुरू कर दिया. सरकार 1971 के बाद की घुसपैठ को लेकर कोई भी रियायत देने की स्थिति में नहीं है.

 

 

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