Sri Guru Granth Sahib: पावन स्वरूपों की छपाई पर रोक से पाकिस्तान के गुरुद्वारों में भी इंतजार, जत्थेदार ने पंजाब सरकार से एक्ट वापस लेने की मांग की
एसजीपीसी ने संशोधित कानून के विरोध में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूपों की छपाई और वितरण रोका।
अमृतसर। पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूपों की छपाई(Sri Guru Granth Sahib news) और वितरण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राज्य सरकार के ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ के विरोध में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने छपाई और वितरण की प्रक्रिया स्थगित कर रखी है। इसका असर अब पाकिस्तान के गुरुद्वारों पर भी पड़ रहा है, जहां के लिए भेजे गए 25 पावन स्वरूपों की मांग फिलहाल पूरी नहीं हो सकी है।
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने पंजाब सरकार से विवादित कानून से संबंधित अधिसूचना वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक इस संवेदनशील विषय पर संबंधित पक्षों के बीच सहमति नहीं बनती, तब तक सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
पावन स्वरूपों के वितरण पर रोक से बढ़ी परेशानी
एसजीपीसी ने संशोधित कानून के प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूपों की छपाई और वितरण रोक दिया था। शुरुआत में यह रोक एक महीने के लिए लगाई गई थी, लेकिन बाद में इसकी अवधि बढ़ा दी गई। फिलहाल छपाई और वितरण की प्रक्रिया प्रभावित बनी हुई है।
इसका असर पाकिस्तान के विभिन्न गुरुद्वारों की मांग पर भी पड़ा है। पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने 25 पावन स्वरूपों की मांग भेजी थी, लेकिन एसजीपीसी की ओर से प्रक्रिया स्थगित किए जाने के कारण आपूर्ति नहीं हो सकी। जत्थेदार के मुताबिक, हाल के वर्षों में पुनर्निर्मित या बहाल किए गए लगभग 17 अन्य गुरुद्वारे भी पावन स्वरूपों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
यूनिक आईडी और ऑनलाइन जानकारी के प्रावधान पर जताई आपत्ति
जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने संशोधित कानून के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, राज्य सरकार ने कानून में संशोधन करके अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कदम उठाया है।
उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूपों के लिए विशिष्ट पहचान संख्या (यूनिक आईडी) अनिवार्य करने और इससे संबंधित जानकारी वेबसाइट पर सार्वजनिक करने के प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि इन व्यवस्थाओं से सिख धर्म के प्रचार-प्रसार से जुड़े कार्यों में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
जत्थेदार ने मांग की कि इस मामले में व्यापक विचार-विमर्श और आम सहमति बनने तक सरकार संबंधित अधिसूचना वापस ले। साथ ही एसजीपीसी को अपनी मौजूदा नियमावली और अभिलेख व्यवस्था के अनुसार पावन स्वरूपों का वितरण करने की अनुमति दी जाए।
सरकार और अकाल तख्त के बीच बातचीत से नहीं निकला समाधान
जत्थेदार ने बताया कि अकाल तख्त की ओर से निर्धारित समय-सीमा के अंतिम दिन सरकारी प्रतिनिधियों ने सचिवालय का दो बार दौरा किया था। हालांकि, उनके मुताबिक, विवाद सुलझाने की दिशा में कोई संतोषजनक प्रगति नहीं हुई।
राज्य सरकार ने कानून की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की है। दूसरी ओर, अकाल तख्त ने भी विशेषज्ञों की समिति बनाई है। जत्थेदार के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच समाधान की दिशा में औपचारिक बातचीत अभी शुरू नहीं हुई है।
विधायकों से भी मुद्दा सरकार के सामने उठाने की अपील
यह विवाद उस समय फिर चर्चा में आया, जब आम आदमी पार्टी के विधायक मनविंदर सिंह गियासपुरा से जुड़े मामले में अपना पक्ष रखने के लिए पार्टी के कुछ विधायक अकाल तख्त सचिवालय पहुंचे थे। इस दौरान जत्थेदार ने विधायकों से पंजाब सरकार के समक्ष इस मुद्दे को उठाने और जल्द समाधान निकालने की अपील की।
फिलहाल पावन स्वरूपों की छपाई और वितरण पर रोक जारी रहने से पंजाब के बाहर स्थित गुरुद्वारों की मांग भी प्रभावित हो रही है। अब इस पूरे विवाद का समाधान सरकार, अकाल तख्त और एसजीपीसी के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगा।
