चंडीगढ़ की विरासत पर संकट, फ्रांस में 25 अक्टूबर को 9 दुर्लभ फर्नीचर की नीलामी
पीयर जेनरे के डिजाइन किए फर्नीचर की कीमत 2.30 करोड़ रुपये तक; नीलामी रोकने और वस्तुओं के स्वामित्व की जांच के लिए केंद्र व चंडीगढ़ प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग।
चंडीगढ़। चंडीगढ़ की ऐतिहासिक विरासत से जुड़े नौ दुर्लभ फर्नीचर की फ्रांस में प्रस्तावित नीलामी को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्रसिद्ध फ्रांसीसी वास्तुकार पीयर जेनरे द्वारा डिजाइन किए गए इन फर्नीचर की नीलामी 25 अक्टूबर को होनी है। इनकी अनुमानित कीमत 1.73 करोड़ रुपये से 2.30 करोड़ रुपये के बीच बताई गई है।
मामले में एडवोकेट और हेरिटेज प्रोटेक्शन सेल के सदस्य अजय जग्गा ने विदेश मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय और चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने नीलामी से पहले इन वस्तुओं की उत्पत्ति, स्वामित्व और उन्हें विदेश ले जाने की वैधता की जांच कराने की अपील की है।
नीलामी रोकने के लिए अधिकारियों से अपील
अजय जग्गा के अनुसार, फ्रांस के नीलामी घर पेरिस ओइस एंकर की ओर से 25 अक्टूबर को शांति शहर में ‘लक्स, आर्ट एंड क्यूरियोसिटीज’ नीलामी आयोजित की जानी है। इसमें चंडीगढ़ की विरासत से जुड़ी नौ वस्तुएं शामिल हैं।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इन फर्नीचर की सूची और तस्वीरें भेजते हुए जांच पूरी होने तक नीलामी, बिक्री और निर्यात रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने का अनुरोध किया है।
कैटलॉग में चंडीगढ़ के प्रशासनिक भवनों का जिक्र
नीलामी में शामिल फर्नीचर में सीनेट कमेटी चेयर, एवोका आर्मचेयर, एवोका सोफा, बुककेस और ऑफिस केन चेयर जैसी वस्तुएं शामिल हैं। कैटलॉग में इनमें से कई फर्नीचर की उत्पत्ति चंडीगढ़ के प्रशासनिक भवनों से जुड़ी बताई गई है।
एक अन्य फर्नीचर को पटियाला के महाराजा के महल के सहायक भवनों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया बताया गया है। इस वस्तु के स्वामित्व और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की भी जांच कराने की मांग उठाई गई है।
हालांकि, इन वस्तुओं के वास्तविक स्वामित्व और विदेश भेजे जाने की वैधता की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही हो सकेगी।
पहले भी दी गई थी नीलामी की जानकारी
अजय जग्गा ने अपने पत्र में दावा किया कि उन्होंने 25 सितंबर को भी अधिकारियों को चंडीगढ़ की विरासत से जुड़े फर्नीचर की विदेश में नीलामी के बारे में जानकारी दी थी। उनके अनुसार, इसके बावजूद 10 अक्टूबर को एक अन्य नीलामी आयोजित हुई।
उन्होंने प्रशासन से पुराने रिकॉर्ड, फर्नीचर की सूची, निपटान संबंधी दस्तावेजों और विदेश ले जाने की अनुमति की जांच करने की मांग की है। यदि जांच में किसी वस्तु को अवैध रूप से हटाए जाने के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित पक्षों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की अपील भी की गई है।
सांस्कृतिक विरासत बचाने की जरूरत
जग्गा का कहना है कि चंडीगढ़ के ऐतिहासिक फर्नीचर को केवल व्यावसायिक वस्तु के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ये वस्तुएं शहर की स्थापत्य पहचान और सांस्कृतिक इतिहास से जुड़ी हैं।
ऐसे में नीलामी से पहले वस्तुओं की पहचान, उनके स्वामित्व का सत्यापन और विदेश में बिक्री रोकने के लिए समय रहते कार्रवाई करना जरूरी है। अब संबंधित अधिकारियों के हस्तक्षेप और जांच पर नजर रहेगी।





