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IMF की बैठक में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंथन, रूसी वित्त मंत्री के संबोधन पर कई प्रतिनिधियों का वॉकआउट

बैंकॉक | 17 अक्टूबर 2026

الإمارات تختتم مشاركتها في اجتماعات البنك الدولي وصندوق النقد في واشنطن  -  الاتحاد للأخبار

  • IMF और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था की चुनौतियों पर चर्चा हुई।

  • IMF की संचालन समिति के अध्यक्ष मोहम्मद अल-जदान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की मजबूती के बावजूद सतर्क रहने की जरूरत बताई।

  • रूसी वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव के संबोधन के दौरान कई प्रतिनिधि बैठक से बाहर चले गए।

  • युद्ध, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, बढ़ते कर्ज और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े जोखिम चर्चा के प्रमुख विषय रहे।

वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने कई चुनौतियां

बैंकॉक। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति, वित्तीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेकर चर्चा हुई। 17 अक्टूबर को प्रकाशित रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, IMF की संचालन समिति के अध्यक्ष और सऊदी अरब के वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों के बावजूद मजबूती दिखा रही है, लेकिन परिस्थितियों को लेकर लापरवाही नहीं बरती जा सकती।

बैठकों में युद्ध, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा, सार्वजनिक कर्ज का बढ़ता स्तर तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेजी से विकास से जुड़े जोखिमों पर विचार किया गया। इन मुद्दों का प्रभाव केवल बड़ी अर्थव्यवस्थाओं तक सीमित नहीं है। विकासशील देशों के लिए ऊर्जा की कीमतें, खाद्य आपूर्ति और कर्ज चुकाने की क्षमता आर्थिक स्थिरता के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

रूसी वित्त मंत्री के संबोधन पर वॉकआउट

बैठक के दौरान रूस के वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव के संबोधन के समय कई प्रतिनिधि बाहर चले गए। रॉयटर्स के अनुसार, लगभग आधे प्रतिनिधियों के वॉकआउट में शामिल होने की बात सामने आई। यह घटनाक्रम रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने मतभेदों को दर्शाता है।

कुछ यूरोपीय प्रतिनिधियों ने इस कदम के जरिए रूस के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शित किया। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संस्थाओं की बैठकों में संवाद बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। अमेरिका की ओर से रूस की भागीदारी को बातचीत के व्यापक संदर्भ में समर्थन दिए जाने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई।

इस घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि वैश्विक वित्तीय संस्थाओं की बैठकें केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं रहतीं। भू-राजनीतिक तनाव भी सदस्य देशों के बीच सहयोग और निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा क्यों महत्वपूर्ण हैं?

युद्ध और व्यापारिक तनाव से अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखलाओं पर दबाव बढ़ सकता है। ऊर्जा की कीमतों में तेजी आने पर परिवहन, उद्योग और बिजली उत्पादन की लागत बढ़ सकती है। इसका असर उपभोक्ताओं और कारोबारों पर पड़ता है। इसी तरह, खाद्य आपूर्ति में बाधा आने से कीमतों में अस्थिरता और कमजोर आय वाले परिवारों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

विकासशील देशों के लिए इन जोखिमों का प्रबंधन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके पास संकट के समय खर्च बढ़ाने या अर्थव्यवस्था को सहारा देने की वित्तीय गुंजाइश सीमित हो सकती है। बैठक में आर्थिक नीतियों, वित्तीय स्थिरता और कमजोर वर्गों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया गया।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आर्थिक असमानता

बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेजी से विकास से जुड़े अवसरों और जोखिमों पर भी चर्चा हुई। नई तकनीक उत्पादकता बढ़ा सकती है और नए उद्योगों के विकास में मदद कर सकती है, लेकिन इससे रोजगार के स्वरूप में बदलाव और देशों के बीच तकनीकी अंतर बढ़ने की आशंका भी है।

IMF की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने बैठक के संदर्भ में बहुपक्षीय संवाद की जरूरत पर जोर दिया। कम आय वाले देशों के सामने यह चुनौती हो सकती है कि वे नई तकनीक से मिलने वाले आर्थिक अवसरों में पीछे न रह जाएं। इसके लिए शिक्षा, डिजिटल बुनियादी ढांचे और निवेश को मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा।

आगे की राह

वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखने के लिए देशों के बीच सहयोग, जिम्मेदार वित्तीय नीतियां और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितताओं को कम करना महत्वपूर्ण है। हालांकि, भू-राजनीतिक मतभेदों के कारण सभी देशों के लिए साझा निर्णय लेना हमेशा आसान नहीं होता।

बैठक के दौरान प्रतिनिधियों के वॉकआउट ने यह भी दिखाया कि आर्थिक संस्थाओं के मंच पर राजनीतिक मतभेदों का प्रभाव बना हुआ है। इसके बावजूद वैश्विक वित्तीय जोखिमों पर संवाद जारी रखना कई देशों के लिए आवश्यक है।

निष्कर्ष: IMF और विश्व बैंक की बैठकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था की मजबूती के साथ युद्ध, ऊर्जा सुरक्षा, कर्ज और तकनीकी बदलावों से जुड़े जोखिमों पर चिंता जताई गई। रूसी वित्त मंत्री के संबोधन पर वॉकआउट ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग के सामने मौजूद राजनीतिक चुनौतियों को भी उजागर किया।

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