उत्तराखंड

उत्तराखंड में 8,372 हेक्टेयर खरीफ फसल प्रभावित, बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की चिंता बढ़ी

देहरादून | 17 अक्टूबर 2026  

खराब मौसम से खेती पर असर

देहरादून। उत्तराखंड में खरीफ फसलों पर प्राकृतिक आपदाओं का असर सामने आया है। कृषि विभाग के आकलन के अनुसार, वर्ष 2026 के खरीफ सीजन के दौरान राज्य में लगभग 8,372 हेक्टेयर कृषि भूमि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हुई। विभाग से जुड़ी रिपोर्ट में 6 से 10 अक्टूबर के बीच हुई बारिश और ओलावृष्टि को हालिया नुकसान का प्रमुख कारण बताया गया है।

खरीफ सीजन किसानों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस अवधि में धान, गन्ना और अन्य मौसमी फसलों की खेती की जाती है। फसल तैयार होने के समय लगातार बारिश, तेज हवा या ओलावृष्टि होने से खेतों में पानी भर सकता है, पौधे गिर सकते हैं और कटाई में देरी हो सकती है। इससे उत्पादन के साथ-साथ फसल की गुणवत्ता और बाजार में मिलने वाली कीमत पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।

ऊधम सिंह नगर और हरिद्वार में नुकसान

प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, ऊधम सिंह नगर जिले में बाजपुर और गदरपुर क्षेत्रों में लगभग 7,730 हेक्टेयर क्षेत्र में धान और गन्ने की फसलों पर असर पड़ा। हरिद्वार जिले में बहादराबाद, बादशाहपुर और जमालपुर न्याय पंचायतों के आसपास लगभग 600 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित बताई गई है। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि मैदानी इलाकों में खेती पर मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का प्रभाव महत्वपूर्ण रहा।

धान की फसल में कटाई के आसपास बारिश होने से दानों की गुणवत्ता और फसल के सुरक्षित भंडारण में समस्याएं पैदा हो सकती हैं। गन्ने के खेतों में तेज हवाओं और जलभराव से भी नुकसान की आशंका रहती है। हालांकि, प्रत्येक खेत में नुकसान की मात्रा अलग हो सकती है। इसलिए जिलेवार आंकड़ों को अंतिम नुकसान का पूरा विवरण मानने से पहले विभागीय सर्वेक्षण की स्थिति देखना जरूरी है।

पहाड़ी जिलों में भी चिंता

रिपोर्टों में अल्मोड़ा और चंपावत को भी हालिया बारिश तथा ओलावृष्टि से प्रभावित जिलों में शामिल किया गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में खेती का स्वरूप मैदानी इलाकों से अलग है। छोटे खेत, ढलानदार जमीन और मौसम पर निर्भर कृषि व्यवस्था के कारण नुकसान का आकलन करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

कृषि विभाग के अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी, खेतों का सर्वेक्षण और नुकसान का विस्तृत आकलन करने के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। सटीक सर्वेक्षण के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने किसानों की फसल को कितना नुकसान हुआ और किस तरह की सहायता की आवश्यकता है।

किसानों के लिए क्या महत्वपूर्ण है?

फसल प्रभावित होने की स्थिति में किसानों को नुकसान की तस्वीरें, खेत का विवरण, उपलब्ध भूमि अभिलेख और संबंधित फसल की जानकारी सुरक्षित रखनी चाहिए। उन्हें स्थानीय कृषि विभाग या प्रशासन से संपर्क करके सर्वेक्षण और राहत संबंधी नियमों की जानकारी लेनी चाहिए। यदि फसल बीमा लिया गया है, तो बीमा की शर्तों और नुकसान की सूचना देने की समय-सीमा की जांच करना भी उपयोगी होगा।

राहत या मुआवजे की पात्रता का निर्धारण संबंधित सरकारी नियमों और सर्वेक्षण के आधार पर होगा। इसलिए किसी निश्चित राशि या भुगतान की घोषणा को सरकारी पुष्टि के बिना प्रकाशित नहीं किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष: उत्तराखंड में खरीफ फसलों पर मौसम की मार किसानों की आय और कृषि उत्पादन के लिए चिंता का विषय है। प्रभावित क्षेत्रों का समयबद्ध सर्वेक्षण और सहायता संबंधी स्पष्ट जानकारी किसानों के लिए महत्वपूर्ण होगी।

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