संसद में खुलासा: पंजाब सीमा से ड्रोन के जरिए बढ़ी नशा तस्करी, देशभर तक फैल रहा नेटवर्क
राज्यसभा में केंद्र सरकार ने साझा किए आंकड़े, 2025 में ड्रोन से बरामद 460 किलो नशीले पदार्थों में 448 किलो हेरोइन
चंडीगढ़। पाकिस्तान से पंजाब सीमा के रास्ते ड्रोन के माध्यम से होने वाली नशा तस्करी को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यसभा में अहम जानकारी दी है। सरकार के अनुसार, वर्ष 2025 में ड्रोन के जरिए पकड़े गए नशीले पदार्थों के अधिकांश मामले पंजाब सीमा से जुड़े रहे। जांच एजेंसियों का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में पहुंचने के बाद यह खेप संगठित नेटवर्क के जरिए देश के विभिन्न राज्यों तक पहुंचाई जाती है।
राज्यसभा में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा दिए गए लिखित उत्तर के अनुसार, वर्ष 2025 में देशभर में ड्रोन के माध्यम से नशीले पदार्थों की तस्करी के 305 मामले दर्ज किए गए। इनमें 298 मामले पंजाब सीमा से संबंधित थे। इन मामलों में करीब 460 किलोग्राम नशीले पदार्थ बरामद किए गए, जिनमें 448 किलोग्राम हेरोइन, 9 किलोग्राम मेथामफेटामाइन और 3 किलोग्राम अफीम शामिल थी।
सीमा से राज्यों तक पहुंच रहा तस्करी नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का और गुरदासपुर जैसे सीमावर्ती जिलों में गिराई गई खेप को पहले स्थानीय नेटवर्क सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाते हैं। इसके बाद सड़क और राष्ट्रीय राजमार्गों के माध्यम से इसे देश के अन्य राज्यों में सक्रिय गिरोहों तक भेजा जाता है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसियों की विभिन्न रिपोर्टों में पंजाब को अंतरराज्यीय नशा तस्करी के प्रमुख ट्रांजिट कॉरिडोर के रूप में चिन्हित किया गया है।
डिजिटल तकनीक से संचालित हो रहा नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, तस्कर अब केवल ड्रोन का ही इस्तेमाल नहीं कर रहे, बल्कि नेटवर्क संचालन के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, लोकेशन शेयरिंग, फोटो-वीडियो ट्रांसफर और अन्य डिजिटल माध्यमों का भी उपयोग कर रहे हैं।
पहचान छिपाने के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि नशे के कारोबार से होने वाले लेनदेन के लिए डिजिटल करेंसी और अन्य वर्चुअल डिजिटल एसेट्स का सहारा लिया जा रहा है। इससे धन के स्रोत तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।
जेल से भी नेटवर्क संचालन के संकेत
सरकारी जानकारी के अनुसार, कुछ मामलों में जेलों में बंद तस्करों के मोबाइल फोन के जरिए अपने सहयोगियों से संपर्क बनाए रखने और नेटवर्क संचालित करने के संकेत भी मिले हैं। इसी वजह से जांच एजेंसियां अब सीमा सुरक्षा के साथ-साथ डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन की भी गहन जांच कर रही हैं।
सीमा सुरक्षा को किया जा रहा मजबूत
केंद्र सरकार ने बताया कि सीमा पर नशा तस्करी रोकने के लिए ड्रोन रोधी प्रणाली, सीसीटीवी निगरानी, लॉन्ग-रेंज कैमरे, नाइट विजन उपकरण, आधुनिक सीमा बाड़ और फ्लडलाइट व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है, ताकि ड्रोन के जरिए होने वाली घुसपैठ और तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।

