सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: फुटपाथ पर सुरक्षित चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार, पैदल यात्रियों को दी प्राथमिकता
शीर्ष अदालत ने कहा- सड़कों पर सबसे पहले पैदल चलने वालों का अधिकार, सुरक्षित फुटपाथ और क्रॉसिंग उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पैदल यात्रियों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि फुटपाथ पर सुरक्षित रूप से चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है और यह अधिकार मोटर वाहनों के उपयोग से कहीं अधिक प्राथमिकता रखता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सड़कें केवल वाहनों के लिए नहीं हैं, बल्कि सबसे पहले पैदल चलने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
यह टिप्पणी एक सड़क दुर्घटना से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें एक पिता अपने पांच वर्षीय बेटे को स्कूल छोड़ने जा रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आने से बच्चे की मौत हो गई थी। मामले में मुआवजे को लेकर दिए गए निचली अदालतों के आदेशों की समीक्षा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित परिवार को बढ़ा हुआ मुआवजा देने का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा कि जिस स्थान पर दुर्घटना हुई, वहां न तो फुटपाथ था और न ही पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग की व्यवस्था थी। न्यायालय ने माना कि शहरी ढांचे में ऐसी कमियां गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं और इन्हें दूर करना सरकारों तथा संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि यदि सुरक्षित फुटपाथ या पैदल पारपथ की कमी के कारण किसी व्यक्ति के अधिकारों का हनन होता है, तो प्रभावित नागरिक संबंधित अधिकारियों या एजेंसियों के खिलाफ कानूनी राहत और मुआवजे की मांग कर सकते हैं।
पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मानव सभ्यता वाहनों के आविष्कार से बहुत पहले से पैदल चलती आई है, इसलिए ‘चलने का अधिकार’ सबसे बुनियादी अधिकारों में से एक है। अदालत ने सड़क नियोजन और बुनियादी ढांचे के विकास में पैदल यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
यह फैसला शहरी विकास, सड़क सुरक्षा और नागरिक अधिकारों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में पैदल यात्रियों के लिए बेहतर और सुरक्षित बुनियादी सुविधाओं का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

