पश्चिम बंगालराजनीति

बंगाल में बड़ा सियासी उलटफेर: ममता बनर्जी को झटका, ऋतब्रत बनर्जी बने नेता प्रतिपक्ष; TMC विधायी दल में दो-फाड़

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर आ रही है। विधानसभा चुनावों में मिली हार के महज एक महीने के भीतर ही ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) गहरे सियासी संकट में घिर गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है, क्योंकि पार्टी के विधायी दल में दो-तिहाई से अधिक की बड़ी टूट हो चुकी है।

विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ने बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी को आधिकारिक तौर पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) के रूप में मान्यता दे दी है। इसके साथ ही ममता बनर्जी के हाथ से विधायी दल का नियंत्रण लगभग फिसल गया है।

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब पिछले महीने TMC महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर को पत्र भेजकर शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष, जबकि नैना बंदोपाध्याय और असीमा पात्रा को उप नेता बनाने का प्रस्ताव दिया था। फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) नामित किया गया था।

लेकिन पार्टी के भीतर सुलग रही असंतोष की आग बुधवार को भड़क उठी। करीब 80 में से 60 विधायकों ने शोभनदेब को अपना नेता मानने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद पार्टी से निष्कासित चल रहे विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा के नेतृत्व में 58 विधायक एकजुट हुए।

“TMC का यह दो-तिहाई मजबूत विधायी दल ‘मैं’ में नहीं, बल्कि ‘हम’ में विश्वास रखता है। हमने हर नियम का पालन किया है और इसीलिए हमें मुख्य विपक्षी दल के तौर पर स्वीकार किया गया है। हम चाहते हैं कि ममता बनर्जी हमारी मुख्य सलाहकार बनें और विपक्ष के रूप में हमें मजबूत करने की सलाह दें।”

बुधवार सुबह से ही हावड़ा की उलुबेरिया (पूर्व) सीट से विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 58 विधायक एक-एक कर विधानसभा परिसर पहुंचने लगे। वहां हुई एक आपात बैठक में विपक्ष के लिए आरक्षित 5 सीटों के लिए नामों का अनुमोदन किया गया और फिर सीधे स्पीकर के कक्ष में जाकर प्रस्ताव सौंप दिया गया। संख्या बल (दो-तिहाई से ज्यादा) मजबूत होने के कारण स्पीकर ने इस दावे को स्वीकार कर लिया।

बागी गुट द्वारा सौंपे गए और स्पीकर द्वारा मंजूर किए गए प्रस्ताव के अनुसार नई टीम इस प्रकार है:

पद नाम विधानसभा क्षेत्र
नेता प्रतिपक्ष (LoP) ऋतब्रत बनर्जी उलुबेरिया (पूर्व), हावड़ा
उप नेता (विपक्ष) संदीपान साहा एंटाली, उत्तरी कोलकाता
उप नेता (विपक्ष) शिउली साहा केशपुर, पश्चिम मेदिनीपुर
उप नेता (विपक्ष) जावेद अहमद खान कस्बा, दक्षिण 24 परगना

हालिया विधानसभा चुनाव में हार के ठीक एक महीने बाद सामने आया यह संकट ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर की सबसे कठिन अग्निपरीक्षाओं में से एक है। 80 में से 58 विधायकों का साथ चले जाना यह साफ करता है कि पार्टी के भीतर सांगठनिक स्तर पर सब कुछ ठीक नहीं था। अब देखना यह होगा कि तृणमूल कांग्रेस का आधिकारिक नेतृत्व इन 58 बागी विधायकों पर क्या कानूनी या राजनीतिक कार्रवाई करता है और बंगाल की राजनीति आगे क्या मोड़ लेती है।

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