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IPL के जमाने में फिर लौटेगा ‘शीश महल’ क्रिकेट टूर्नामेंट, लखनऊ की ऐतिहासिक धरोहर को जीवित करेंगे मोहसिन रजा

पूर्व रणजी क्रिकेटर मोहसिन रजा ने आईपीएल के आने के बाद 2010 से बंद पड़ी इस धरोहर को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया है.

लखनऊ: एक समय देश के डोमेस्टिक क्रिकेट कैलेंडर पर जिसका दबदबा आज के इंडियन प्रीमियर लीग जैसा था, वही लखनऊ की ऐतिहासिक शीश महल क्रिकेट प्रतियोगिता फिर से शुरू करने की कोशिशें तेज हो गई हैं. पूर्व मंत्री और रणजी क्रिकेटर मोहसिन रजा ने लखनऊ की इस अनमोल खेल धरोहर को नए सिरे से शुरू करने का बड़ा बीड़ा उठाया है |

वर्ष 1951 में शुरू हुई शीश महल क्रिकेट प्रतियोगिता 90 के दशक से लेकर साल 2000 तक देश के क्रिकेट जगत में ऐसा रुतबा रखती थी जैसा आजकल आईपीएल का क्रेज है | अप्रैल के महीने में खेली जाने वाली इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में खिलाड़ियों के बेहतरीन प्रदर्शन के आधार पर सीधा भारतीय टीम में चयन हुआ करता था |

गावस्कर और सचिन को छोड़ सबने खेला टूर्नामेंट: अपने जमाने में केवल सुनील गावस्कर और सचिन तेंदुलकर को छोड़कर बाकी देश के सभी बड़े दिग्गज क्रिकेटर इस प्रतियोगिता में अनिवार्य रूप से खेला करते थे | मोहसिन रजा बताते हैं कि शीशमहल टूर्नामेंट हर साल गर्मियों के दौरान नवाबों के शहर लखनऊ में आयोजित किया जाता था | उत्तर प्रदेश की प्रचंड गर्मी के बीच भारत के दिग्गज अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी मैदान पर पसीना बहाते थे | उस समय लाखों उत्साही घरेलू क्रिकेट प्रशंसक अपने पसंदीदा स्टार्स को देखने के लिए खचाखच भरे स्टेडियम में मौजूद रहते थे |
सुबह 6:30 बजे शुरू हो जाता था खेल: गर्मियों के मौसम में भीषण गर्मी और लू से बचने के लिए मैचेस सुबह ठीक 6:30 बजे ही शुरू कर दिए जाते थे | जब शीशमहल टूर्नामेंट अपने चरम पर था, तब भारत के पूर्व कप्तान मंसूर अली खान पटौदी, कपिल देव और बिशन सिंह बेदी सहित शीर्ष खिलाड़ियों की टोलियां भी इसकी मुरीद हो गई थीं | 1951 में शुरू हुआ शीशमहल क्रिकेट टूर्नामेंट असल में वरिष्ठ क्रिकेट प्रेमी एम. अस्करी हसन के अनोखे दिमाग की उपज थी |  हसन ने लंबे समय तक उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ में शीर्ष प्रशासनिक पदों पर काम किया था |
18 साल के धोनी ने जड़ा था शानदार अर्धशतक: शीशमहल टूर्नामेंट में बढ़िया प्रदर्शन करने वाले प्रतिभावान खिलाड़ी सीधे नेशनल सिलेक्टर्स की पैनी नजर में आ जाते थे, जैसा काम अब आधुनिक युग में आईपीएल कर रहा है | एक वक्त था जब विकेटकीपर-बल्लेबाज के तौर पर महेंद्र सिंह धोनी पहली बार लखनऊ की इसी शीश महल ट्रॉफी के जरिए देश के सामने आए थे | तब महज 18 साल के युवा महेंद्र सिंह धोनी ने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड की टीम के लिए खेलते हुए एक शानदार अर्धशतक बनाया था | शीशमहल टूर्नामेंट में हाफ सेंचुरी लगाने के बाद से ही धोनी क्रिकेट की बड़ी दुनिया में तेजी से पॉपुलर होने लगे थे |
Photo Credit: ETV Bharat

धोनी को पहचान दिलाने वाली लखनऊ की ऐतिहासिक ट्रॉफी फिर होगी शुरू 

 

बिशन सिंह बेदी भी 5 साल तक खेले मैच: मोहसिन रजा ने पुरानी यादें साझा करते हुए बताया कि उन्होंने खुद भी एक खिलाड़ी के तौर पर लंबे समय तक शीश महल टूर्नामेंट में पार्टिसिपेट किया था | वे अपनी यादों को ताजा करते हुए भावुक होकर कहते हैं कि वह भारतीय क्रिकेट खेल का एक बिल्कुल अलग और सुनहरा युग था | भारत के सर्वकालिक महान स्पिनरों में से एक बिशन सिंह बेदी अपने गृह शहर अमृतसर की एक लोकल टीम के लिए यहाँ लगातार पांच साल तक मैच खेले | यह ऐतिहासिक टूर्नामेंट साल 2010 में देश में आईपीएल का व्यावसायिक प्रभाव बढ़ने के बाद अचानक पूरी तरह बंद हो गया |

सीएम योगी आदित्यनाथ से मदद लेंगे मोहसिन रजा: अधिकांश स्टार खिलाड़ियों के इंडियन प्रीमियर लीग के व्यस्त शेड्यूल में व्यस्त हो जाने के कारण शीश महल ट्रॉफी को बंद करना पड़ा था | अब मोहसिन रजा के निजी प्रयासों से उम्मीद जगी है कि लखनऊ की यह गौरवशाली खेल परंपरा फिर से जीवित होगी और घरेलू क्रिकेटरों को एक बार फिर बड़ा मंच मिलेगा | मोहसिन रजा कहते हैं कि इस धरोहर को वापस लाने के लिए हमारे प्रयास युद्ध स्तर पर जारी हैं और आगामी जून के विंडो में इस प्रतियोगिता को कराया जा सकता है | उन्होंने बताया कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस विषय में मिलकर खेल निदेशालय को निर्देशित कराएंगे और उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन की भी मदद लेंगे |

लखनऊ के क्रिकेटर्स को याद आया पुराना दौर: लखनऊ के सीनियर क्रिकेटर अशोक बॉम्बी ने कहा कि उन्होंने लगभग 28 साल लगातार इस क्रिकेट प्रतियोगिता में हिस्सा लिया | पहले यह मुकाबला दो दिन का होता था, लेकिन बाद में इसको एक दिवसीय किया गया. उन्होंने इसमें नवजोत सिंह सिद्धू, वीरेंद्र सहवाग, महेंद्र सिंह धोनी, नवाब पटौदी और ऐसे ही जाने कितने ही सीनियर क्रिकेटर्स को खेलते हुए देखा है | लखनऊ के वरिष्ठ क्रिकेट प्रशिक्षक गोपाल सिंह बताते हैं कि हिंडाल्को और कुछ ऐसे ही अन्य टीमों के साथ उन्होंने शीश महल ट्रॉफी में कई बार हिस्सा लिया था. यह प्रतियोगिता फिर से शुरू होनी चाहिए |

शीश महल ट्रॉफी में शानदार मुकाबले होते थे. वरिष्ठ क्रिकेटर समीर मिश्रा बताते हैं कि उन्होंने भी कई बार इस चैंपियनशिप में हिस्सा लिया| अलग-अलग टीमों से खेलने का मौका मिला. लखनऊ के क्रिकेटर्स को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर्स के साथ जुड़ने का मौका मिलता था | इससे उनके खेल में निखार आता था |

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