गोरखपुर में सीएम योगी ने गोड़धोइया नाला प्रोजेक्ट का लिया जायजा, पांच लाख की आबादी को मिलेगा सीधा लाभ
सीएम ने बताया, यह परियोजना 15 जून तक पूरी हो जाएगी. 40 साल तक जलजमाव की नहीं आएगी समस्या|
गोरखपुर : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार शाम गोड़धोइया नाला परियोजना के कार्यों का (जीरो पॉइंट जंगल छत्रधारी और बिछिया एसटीपी) स्थलीय निरीक्षण किया. सीएम ने जल्द से जल्द कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए. बिछिया एसटीपी के पास जनसमूह को संबोधित भी किया. मुख्यमंत्री ने कहा, यह परियोजना 15 जून तक पूरी हो जाएगी.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 495 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे गोड़धोइया नाला परियोजना (पक्का नाला निर्माण, डायवर्जन, इंटरसेप्शन और ट्रीटमेंट परियोजना) के कार्यों का जायजा लेने सबसे पहले जीरो पॉइंट जंगल छत्रधारी पहुंचे | उन्होंने निर्माण कार्य, पक्के नाले में जल प्रवाह को देखने के साथ ही परियोजना के ड्राइंग मैप व मॉडल का अवलोकन किया |
कार्यदायी संस्था जल निगम (शहरी) के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि परियोजना की अब तक की कुल भौतिक प्रगति 95 प्रतिशत है | इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत 9.25 किमी की लंबाई में नाला निर्माण हो चुका है| 38 एमएलडी की एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) बन गई और वर्तमान में इसका ट्रायल रन चल रहा है | 61 एमएलडी क्षमता के पंपिंग स्टेशन का भी कार्य पूर्ण हो गया है और इसका भी ट्रायल रन किया जा रहा है |
17.94 किमी इंटरसेप्टिंग सीवर लाइन में से 17.50 किमी तक काम हो गया है, शेष कार्य भी जारी है | 14 ब्रिज/कल्वर्ट भी बन गए हैं. शेष कार्य को भी तेजी से कराया जा रहा है | यह परियोजना एक मृत नाले को पुनर्जीवित करने का माध्यम बनी है | उन्होंने कहा कि गोड़धोइया नाले के पुनरूद्धार का निर्माण कार्य को लगभग 15 जून तक पूर्ण करने का प्रयास है | इससे गोरखपुर को जल जमाव, मच्छर व बीमारी की समस्या का स्थायी समाधान प्राप्त होगा |
ईज ऑफ लिविंग का मॉडल बन रहा गोरखपुर : सीएम योगी ने कहा कि किसी भी शहर की सूरत को बदलने, लोगों के जीवन में व्यापक परिवर्तन लाने और ईज ऑफ लिविंग को सर्वोत्तम बनाने के लिए क्या मॉडल होना चाहिए, आज गोरखपुर शहर उसका एक उदाहरण बन रहा है | पिछले 9 वर्ष में गोरखपुर महानगर ने बहुत सारी उपलब्धियां हासिल की हैं | आज गोरखपुर में चारों दिशाओं से फोरलेन सड़कों की कनेक्टिविटी है |
गोरखपुर में रामगढ़ताल का सुंदरीकरण हो चुका है | गोरखपुर में जल निकासी की उचित व्यवस्था, खुले नालों को बंद करने की व्यवस्था तथा उसमें बहने वाले जल को उपचारित करने की व्यवस्था की जा रही है | उन्होंने कहा कि कभी छोटी नदी रही गोड़धोइया नाला एक गंदा नाला बन चुका था | यह जंगल छत्रधारी होते हुए रामगढ़ताल में गिरता था | पहले यह नाला गंदगी, प्रदूषण, मच्छर, जलजमाव का कारण बन जाता था | आज इसका पुनरूद्धार कर इसे अत्याधुनिक मॉडल के रूप में खड़ा किया जा रहा है |
नाले के दोनों तरफ मिलेगा वैकल्पिक मार्ग : मुख्यमंत्री ने कहा, अब गोड़धोइया नाले में कोई सीवर और कोई गंदा नाला नहीं गिर रहा है, इसमें केवल शुद्ध पानी प्रवाहित होगा | सीवर और ड्रेनेज के लिए इसमें दोनों तरफ अलग से लाइन बिछायी गयी है, जो भूमिगत है. उन्होंने कहा कि करीब 9.5 किमी का आरसीसी से निर्मित किया नाला 9 मीटर चौड़ा है | वर्षा काल में यह नाला गोरखपुर महानगर के जल को रामगढ़ताल, तरकुलानी होते हुए राप्ती नदी में छोड़ देगा |
नाले के दोनों तरफ सड़क के निर्माण कार्य को भी आगे बढ़ाया जा रहा है | इससे इस क्षेत्र के लोगों को एक वैकल्पिक मार्ग प्राप्त होगा | इस प्रोजेक्ट को तैयार करने वाली अहमदाबाद की फर्म मेसर्स एलसी इंफ्रा जेवीपीसी के महाप्रबंधक जीतेन्द्र तिवारी ने इस प्रोजेक्ट और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के संबंध में बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जल भराव की समस्या के निदान के लिए जो खुद से इसके ड्राइंग डिजाइन में पहल की है उसके आधार पर आने वाले 40 वर्षों तक के पानी के दबाव को यह नाला वहन कर लेगा | जल भराव की समस्या खत्म होगी | बीमारी घटेगी और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले शुद्ध जल से रामगढ़ ताल भी प्रदूषित नहीं होगा |