अंतराष्ट्रीय

ईयू की यह पहल अमेरिका और चीन के लिए बड़ा झटका (अमेरिका )

दिल्ली : विश्व में तेजी से बदल रही परिस्थितियों और वेनेजुएला, यूक्रेन व ग्रीनलैंड पर ट्रंप के अड़ियल रुख के चलते यूरोपीय देशों का भरोसा अमेरिका   (अमेरिका )  और उसके राष्ट्रपति से पूरी तरह उठ चुका है। लिहाजा यूरोपीय संघ अब वैकल्पिक भरोसेमंद देश के रूप में भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर अधिक भरोसा कर रहा है। यह बात हम नहीं कह रहे, बल्कि खुद यूरोपीय संघ के बड़े नेता कह रहे हैं। यूरोपीय संघ ने अमेरिका के साथ बढ़ते तनावों के बीच भारत के साथ मिलकर नये शक्तिशाली एजेंडे पर काम करने का ऐलान करके पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है। जाहिर है कि दुनिया अब भारत की ओर से उम्मीद भरी निगाहों से देख रही है। इसके पीछे पीएम मोदी का शानदार और मजबूत नेतृत्व का कमाल है।

भारत के साथ यूरोपीय संघ करेगा रणनीतिक साझेदारी
यूरोपीय संघ ने भारत के साथ अपने रिश्तों को मजबूत करने के लिए बड़ी रणनीतिक और सुरक्षा साझेदारी का ऐलान किया है। ईयू की यह पहल अमेरिका और चीन के लिए बड़ा झटका है। EU की विदेश नीति प्रमुख और यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कलास ने बुधवार को यूरोपीय संसद में घोषणा करकते कहा कि दोनों पक्षों ने नई सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी (Security and Defence Partnership) पर हस्ताक्षर के लिए सहमति जता दी है। यह समझौता समुद्री सुरक्षा, तंकवाद-रोधी कार्रवाई और साइबर रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार देगा। इससे यूरोपीय संघ (EU) और भारत के बीच रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग में नया अध्याय शुरू होने वाला है।

नई दिल्ली में भारत-ईयू के बीच बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर संभव
कलास ने कहा, “यूरोप भारत के साथ एक शक्तिशाली नया एजेंडा लागू करने के लिए तैयार है।” उन्होंने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में खुले समुद्री मार्गों की रक्षा, समुद्री जागरूकता मजबूत करने और जबरदस्ती का विरोध करने में दोनों की भूमिका पर जोर दिया। ह साझेदारी अगले सप्ताह नई दिल्ली में होने वाले 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन 27 जनवरी के दौरान हस्ताक्षरित होगी। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा भारत की गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे।

कलास ने कहा-यूरोप के लिए भारत सबसे महत्वपूर्ण
कलास ने भारत को यूरोप के लिए सबसे महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि यूरोप के आर्थिक लचीलापन के लिए भारत “अनिवार्य” है। कहा कि दोनों प्रमुख लोकतंत्रों को वैश्विक अस्थिरता के दौर में अधिक महत्वाकांक्षी साझेदार बनना चाहिए। इस समझौते से सूचना सुरक्षा समझौते पर बातचीत भी शुरू होगी, जो गोपनीय जानकारी साझा करने को आसान बनाएगा। वैश्विक चुनौतियां बढ़ने के दौरान यूरोपीय संघ और भारत के बीच होने वाली यह प्रस्तावित साझेदारी व्यापार, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा महत्वपूर्ण कदम होगी। इस शिखर सम्मेलन में 2030 तक के नये व्यापक रणनीतिक एजेंडे को भी अपनाया जाएगा।

Show More

यह भी जरुर पढ़ें !

Back to top button